दिगंबर जैन मुनि तरुण सागर ने ली समाधि
सब हेड... जैन समाज में शोक की लहर, दी श्रद्धांजलि
- 1992 में आए थे झांसी, पुस्तक का हुआ था विमोचन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। प्रवचन की अनूठी शैली से अपनी अलग पहचान बनाने वाले दिगंबर जैन मुनि तरुण सागर शनिवार की सुबह दिल्ली में समाधिस्थ हो गए। यह जानकारी होने पर यहां जैन समाज में शोक की लहर दौड़ गई। करगुवां जी में उन्हें श्रद्धालुओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
जैन मुनि तरुण सागर पद विहार करते हुए 1992 में झांसी आए थे। यहां उन्होंने किले में मैदान में प्रवचन दिए थे। इस दौरान बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ. कल्याण सिंह ने उनकी पुस्तक ‘क्रोध को कैसे जीतें’ का विमोचन किया था। जैन मुनि कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। शुक्रवार की शाम उन्होंने आहार - पानी का त्याग कर उपाध्याय गुप्तिसागर समेत अन्य संतों के सानिध्य में क्षमा भाव व्यक्त किया और दर्शन को जुटे हजारों श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। शनिवार की सुबह 3.15 बजे प्रभु का स्मरण करते हुए 51 वर्ष की आयु में देह त्याग दिया। उल्लेखनीय है कि तरुण सागर महाराज 13 वर्ष की आयु में वैरागी हो गए थे। अपने दीक्षा समारोह में उन्होंने स्वयं मंगलाचारण किया था।
शनिवार को करगुवां जी में आर्यिका पूर्णमति के सानिध्य में जैन मुनि को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने पांच मिनट का मौन धारण कर तरुण सागर महाराज की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
समस्याएं सुलझाईं
मुनि तरुण सागर महाराज ऐसे प्रतिभा संपन्न संत थे, जिनके प्रवचनों के माध्यम से तमाम लोगों ने अपने जीवन की समस्याएं सुलझाईं। उन्होंने अल्पायु में समाज को बहुत कुछ दिया है।
- कैलाश चंद्र जैन, पूर्व अध्यक्ष - दिगंबर जैन महासमिति
अहिंसा का मार्ग दिखाया
जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने जन-जन को भगवान महावीर काअहिंसा का मार्ग दिखाया। उनके प्रवचन के दौरान मौजूद रहने वाले सभी श्रद्धालुओं को ऐसा लगता था कि जैसे वे उसी से संवाद कर रहे हैं।
- जितेंद्र चौधरी, कोषाध्यक्ष - दिगंबर जैन पंचायत
सदा जीवंत रहेंगे
मुनि तरुण सागर का जाना समाज के लिए सभी के लिए अपूर्णीय क्षति है। लेकिन, वे अपने प्रवचनों के माध्यम से सभी के दिल में सदैव जीवंत रहेंगे। उन्होंने लोगों की सोच को बदलने का काम किया।
- डॉ. हीरालाल जैन, समाजसेवी
बदली दशा और दिशा
देश और दुनिया की सुख-शांति के लिए सभी को जैन मुनि के आदर्श अपनाने होेंगे। उनके प्रवचनों में आम आदमी का जुड़ाव रहता था। उन्होंने लोगों की दशा और दिशा बदलने का काम किया।
- रवींद्र कुमार जैन, उपाध्यक्ष दिगंबर जैन पंचायत