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1875 कारतूस पहुंच गए बदमाशों के हाथ में

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झांसी। रेंज में पिछले दो साल में 1875 कारतूस बदमाशों के हाथ में पहुंच गए हैं। यह आंकड़ा सिर्फ वह है जिसे झांसी के साथ ललितपुर व उरई पुलिस ने बरामद किया है। इसके अलावा की संख्या का अंदाजा आप स्वयं लगा सकते हैं। अब यह जिन बदमाशों के पास मिले हैं, वह कारतूस कहां से आए हैं। इसकी जांच पुलिस कर रही है।
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हथियारों से लैस बदमाश आए दिन कोई न कोई वारदात करते हैं। पुलिस इनको पकड़ती है। चोरी, लूट, डकैती के साथ ही तमंचे व कारतूस भी बरामद होते हैं। आमतौर पर झांसी रेंज के साथ ललितपुर व जालौन प्रतिदिन किसी ने किसी बदमाश से तमंचा व कारतूस भी बरामद करती है। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पुलिस दो साल के भीतर 1875 कारतूस बरामद कर चुकी है। पुलिस ने बाकायदा इन मामलों में चार्जशीट लगाकर भी थाने भेज दी, लेकिन अब तक यह पता नहीं चल सका कि यह कारतूस कहां से आए।
इन घटनाओं से पुलिस की कार्यप्रणाली पर तो प्रश्नचिह्न लगता ही है, सवाल भी खड़ा होता है कि आखिर इन बदमाशों के पास कारतूस कहां से आते हैं। वे दहशत फैलाने के लिए अंधाधुंध गोलियां दागते रहते हैं। यह तब है जब गन लाइसेंस की दुकानों पर लाइसेंस पर दर्ज संख्या के हिसाब से ही कारतूस दिए जाते हैं। लाइसेंसी जितने कारतूस खरीदता है उसका 80 प्रतिशत खोखा उसे जमा करना पड़ता है। शस्त्र कारोबारियों का कहना है कि पहले एक साल में एक लाइसेंसधारक को अधिकतम 100 कारतूस ही मिलते थे। अब संख्या कुछ बढ़ाने की बात कही जा रही है। पुलिस व प्रशासन की चल रही जांच में गन लाइसेंस धारकों को यह बताना पड़ता है कि उसने कारतूस कहां खर्च किए थे।
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खोेखा का कोई अता-पता नहीं
लाइसेंसी दुकानों से ही असलहे के लिए कारतूस जारी होता है। एक साल में 100 से 200 तक एक लाइसेंसी को कारतूस जारी किया जाता है। नियम यह है कि वह उन कारतूसों का खोखा जमा करने पर ही दोबारा कारतूस पा सकता है। पर इस नियम सौ फीसदी पालन नहीं होता है। लाइसेंसी खोखा जमा किए बिना ही लाइसेंस हासिल कर लेता। इसकी बड़ी वजह प्रशासनिक लापरवाही भी है। इस बात की कभी ठीक से जांच ही नहीं होती है कि जो लाइसेंस जारी हुए उसके खोखा कहा हैं।
अवैध तरीके से नहीं बनते कारतूस
शस्त्र कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि आए दिन फायरिंग व बड़े पैमाने पर कारतूसों का बदमाशों के पास से पकड़ा जाना बड़ा सवाल खड़ा करता है। आखिर ये कारतूस कहां से आ रहे हैं। इस सवाल के पीछे भी बड़ी वजह है। असलहे तो अवैध तरीके से बनाकर बेचे जा रहे हैं, लेकिन कारतूस तो सिर्फ फैक्ट्री में ही बनते हैं। फिर पुलिस व प्रशासन को इसका जवाब ढूंढना ही होगा। बदमाशों के पास इतने बड़े पैमाने पर कारतूस कहां से आते हैं। इनको कौन मुहैया कराता है।
बदमाशों से बरामद होने वाले तमंचे व कारतूसों के मामलेे में पुलिस की जांच जारी है। जल्द ही, पुलिस इस मामले में बड़ी कार्रवाई करेगी। कारतूस की बिक्री के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है। पुलिस व प्रशासन की संयुक्त जांच जारी है। कारतूसों का मिलान भी कराया जा रहा है।
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श्रीप्रकाश द्विवेदी, एसपी सिटी
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