शिवपुरी मार्ग पर पहूंज नदी के पुल और आसपास के पानी की सफाई का काम शुरू हो गया है। पहूंज पुल से नदी में कचरा न फेंका जा सके, इसलिए लोहे का जाल लगाया जाएगा। लोहे का जाल नौ फीट ऊंचा और 120 मीटर लंबा लगाया जाएगा।
केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने दस दिन पहले पहूंज नदी का निरीक्षण किया था। नदी में गंदगी देखकर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की थी और दस दिन में नदी की सफाई कराने के निर्देश नगर निगम के अफसरों को दिए थे। उन्होंने नदी के पुल के नीचे कचरे का ढेर लगा होने पर इसका कारण पूछा तो अफसरों ने बताया था कि पुल के ऊपर से कचरा फेंका जा रहा है। उन्होंने पुल के किनारे लोहे का जाल लगाने के निर्देश दिए थे।
नगर निगम को यह काम करना है। इसलिए आनन- फानन में एस्टीमेट बनाया जाने लगा है। जल्द ही इसका टेंडर निकाला जाएगा। लोहे का जाल चार अलग-अलग हिस्सों में लगाया जाएगा, इसलिए प्रयास किया जा रहा है कि जाल को इस तरह तैयार किया जाए कि लोहा अधिक भारी न हो।
उधर, नदी में कचरे की सफाई का काम शुरू कर दिया गया। हालांकि स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है इस कारण काम थोड़ा धीमी गति से चल रहा है। क्योंकि, नगर निगम की पूरी मशीनरी सर्वेक्षण में जुटी हुई है।
नदी में सफाई कर्मचारियों की दस सदस्यीय टीम काम कर रही है। जब तक लोहे के जाल का टेंडर फाइनल होगा, तब तक नदी में कचरा की सफाई हो जाएगी। पहूंज नदी के पुल के ऊपर नौ फीट ऊंचा जाल लगाया जाएगा, ताकि कोई हाथ ऊपर करके कचरा न डाल सके। नौ फीट की ऊंचाई के बाद सरिया पुल की तरफ एक- एक फीट मोड़े जाएंगे। जाल चार हिस्सों में लगेगा। पहूंज नदी पर बना पुल 120 मीटर लंबा है, इसलिए पूरी लंबाई में लोहे का जाल लगाया जाएगा।
नगर आयुक्त प्रताप सिंह भदौरिया ने बताया कि लोहे के जाल का एस्टीमेट तैयार होने के बाद उसका टेंडर निकाला जाएगा और जल्द काम शुरू होगा।
नीचे सफाई, ऊपर से कचरा फेंका
सफाई कर्मचारियों की टीम नदी में सफाई कर रही थी, लेकिन पुल के ऊपर से कचरा फेंकने से बाज नहीं आ रहे थे। उन्हें न तो इससे मतलब था कि केंद्रीय मंत्री ने कचरा फेंकने पर रोक लगाई है और न ही उन्हें इससे मतलब था कि नदी की सफाई हो रही है। ऐसे ही लोग नदी को गंदा करने के लिए जिम्मेदार हैं।