फोटो सहित क्रमांक - 3
कैप्सन - माताटीला बांध का अवलोकन करती टीम
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इजरायली टीम के लिए बारिश बनी बाधा
तहसील के किसी भी गांव में जाकर नहीं ले सके कृषि संसाधनों की जानकारी
तालबेहट। इजरायल की तर्ज पर बुंदेलखंड में खेती की तकनीक विकसित करने आई कृषि विशेेषज्ञों की टीम बारिश के चलते विकास खंड तालबेहट के एक भी गांव का भ्रमण नहीं कर सकी। टीम को तीन गांवों में जाकर वहां जल संसाधनों, मिट्टी और खेती के तरीकों को देखना था। टीम ने माताटीला बांध का अवलोकन कर जलस्रोतों के बारे में अधिकारियों से कुछ जानकारियां अवश्य लीं।
बुंदेलखंड में कुछ वर्षों से काफी कम वर्षा होने के कारण यहां के किसानों को उनकी मेहनत का सही लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके निदान के लिए सरकारों ने करोड़ों रुपये नहर, कूप, चेकडैम और बांधों के निर्माण में खर्च भी किए। इसके बावजूद किसान के पास सिंचाई के समय पानी की कमी दिखी। इस पर इस बार केंद्र सरकार ने इजरायल की तर्ज पर इस क्षेत्र में कृषि तकनीक को विकसित करने की योजना बनाई और उसका अनुबंध किया। इसके अवलोकन के लिए इजरायल से चार सदस्यीय टीम ललितपुर जनपद के एक दिवसीय भ्रमण पर आई। टीम को विकासखंड तालबेहट के ग्राम चंद्रापुर, विजयपुरा और ककड़ारी गांवों का निरीक्षण कर वहां के किसानों की जमीनों, जलस्रोतों और जल संसाधनों को देखकर कृषि के माध्यम से किसानों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने की व्यापक कार्य योजना बनानी हैं। बताते चले कि इजरायल में पानी की बेहद कमी के बावजूद वहां कृषि तकनीकी का उपयोग करके विश्व में अच्छी पैदावार करने वाले देशों में गिना जाता है।
बारिश के चलते टीम किसी गांव में नहीं गई। झांसी से ही विलंब से चली टीम ने माताटीला बांध का अवलोकन किया। टीम के सदस्यों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से बांध के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इस मौके पर जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह, उपजिलाधिकारी पद्म सिंह के अलावा जल संस्थान, जल निगम के अधिशासी अभियंता सहित कुछ विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।
किसान करते रहे टीम के आने का इंतजार
तालबेहट। इजरायल की टीम के गांवों में आने की खबर से तीनों गांव के किसानों में सुबह से काफी उत्सुकता रही। चंद्रापुर में तो दस बजे के बाद सड़क के किनारे खेतों वाले किसान तो गांव की सड़क पर टकटकी लगाए गाड़ियों के काफिले का इंतजार करते रहे पर, दोपहर बाद हुई बारिश के बाद जब टीम द्वारा गांव में जाने का कार्यक्रम निरस्त करने की सूचना मिली तो किसान मायूस हो गए।