बड़ागांव के ढिमरौनी गांव निवासी नीरज रजक प्राइवेट काम करते हैं। उनकी इकलौती बेटी आशा (18) महंत लक्ष्मणदास कन्या इंटर कॉलेज में 11वीं कक्षा में पढ़ती थी। त्योहार की वजह से गुरुवार को आशा स्कूल नहीं गई। दोपहर करीब 11 बजे वह कपड़े धोने के लिए खादान पर गई थी। उसके साथ दादी रामश्री भी थी।
इसी समय अचानक आशा का पांव फिसल गया। वह खादान में गिर गई। उसे तैरना नहीं आता था। आशा के गिरने पर रामश्री ने शोर मचाया। शोर सुनकर गांव के लोग भी आ गए। खादान करीब 30 फीट गहरी है। पुलिस ने गोताखोरों को बुलाया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद किसी तरह आशा को बाहर निकाला गया। मेडिकल कॉलेज लाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घर में मचा कोहराम
आशा की मौत के बाद घर में कोहराम मच गया। आशा अपने माता-पिता की इकलौती बेटी थी। उससे छोटे दो भाई 14 साल का सूरज और 11 साल का राज है। इकलौती बेटी की मौत की खबर सुनकर मां पूजा और पिता नीरज का रो-रोकर बुरा हाल है।