ओएलएक्स के नाम पर हजारों की ठगी
झांसी। महानगर में ओएलएक्स के नाम पर ठगों ने छह से अधिक लोगों को अपना शिकार बना लिया। मोबाइल और बाइक के नाम पर रकम खाते में मंगाई गई। इसके बाद सामान की आपूर्ति न होने पर ठगी की जानकारी हुई। थानों पर की गई शिकायत के बाद साइबर सेल ने मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।
ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल ओएलएक्स के नाम पर लोगों को ठगने का सिलसिला शुरू हो गया है। इस वेबसाइट पर विज्ञापन डालकर साइबर अपराधी लोगों को ठग रहे हैं। ठगी का शिकार जिला अस्पताल में तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी राकेश भी हो गए। उन्होंने उक्त शॉपिंग पोर्टल पर एक स्कूटी की फोटो देखी। नई सी दिखने वाली स्कूटी की कीमत कम थी, जिसे देखने के बाद फोटो के साथ दिए गए नंबर पर संपर्क किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने अपने आप को सेना का जवान बताया। गाड़ी की कीमत साढ़े चौबीस हजार थी, जिसके बाद बीस हजार छह सौ रुपये में कीमत तय हुई। उन्होंने आधी रकम बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दी। इसके बाद उक्त नंबरों पर संपर्क किया गया तो मोबाइल नंबर ऑफ बताता रहा। राकेश की तरह महानगर के छह से अधिक लोग इस गिरोह के शिकार हो चुके हैं।
बताया गया है कि ओएलएक्स पोर्टल पर ठगों की पूरी नजर है। किसी भी बेचने वाले सामने का विज्ञापन इस साइट पर डाला जाता है तो इस पर गैंग के सदस्यों की नजर रहती है। वाहन की ऑनलाइन जानकारी के बाद ये गैंग पूरी रेकी कर लेता है। फर्जी नंबर से फोन कर पूरी जानकारी जुटाई जाती है। इसके बाद गैंग का सदस्य लोगों को ठगते हैँ।
केस नंबर 1
- बरुआसागर निवासी करन प्रजापति ने ओएलएक्स पर मोबाइल देखा, जिसकी कीमत 12,283 रुपये थी। एक नंबर दिया गया था, जिस पर संपर्क कर सौैदा तय हो जाने के बाद खाते का नंबर ले लिया। रुपये स्थानांतरित होने के बाद नंबर स्विच ऑफ बताने लगा। शक होने पर पुलिस से शिकायत की गई।
केस नंबर 2
- प्रेमनगर स्थित पुलिया नंबर नौ निवासी पुष्पेंद्र सिंह यादव ने बुलेट गाड़ी देखी, जिसकी कीमत 35 हजार बताई गई। बातों में आकर उन्होंने खाते मेें 35 हजार रुपये डाल दिए। बाइक न आने के बाद उनको ठगी का अहसास हुआ। पुलिस इस मामले की भी जांच कर रही है।
इस तरह हो रही ठगी
ठग जिस सामान को बेचने का विज्ञापन डालते हैं, उसकी कीमत कम रखते हैं। जब खरीदार संपर्क करता है तब ठग खुद को बड़ा आदमी या सैनिक बताकर कहता है कि वह इसे बेचकर दूसरा खरीदेगा। फिर वह कुछ पैसा अकाउंट में डालने को बोलता है। पैसा डालने पर फोन करके कहता है कि सामान भेज दिया है। थोड़ा और पैसा डालिए तो कोरियर से आपके घर पहुंच जाएगा। उधर खरीदार को या तो सामान मिलता ही नहीं या जो पैकेट पहुंचता है उसमें कुछ और ही भेज दिया जाता है।
ऐसे बच सकते हैं
एक्सपर्ट मोहसिन खान ने बताया कि सतर्कता ही इस ठगी से बचा सकती है। उन्होंने बताया कि कोई भी सामान खरीदने से पहले इन बातों का ख्याल रखें। जैसे, वाहन खरीदने वाले आधार कार्ड पहले ही मांगें। यदि ग्राहक ओएलएक्स पर विज्ञापन देखकर आया है, तो उसका फेसबुक, ईमेल भी जरूर होगा।