सुकवां गांव में लगे पीपल के पेड़ को विरासत में दर्ज करने के लिए चिह्नित किया गया।
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झांसी। मंडल के सौ साल से अधिक पुराने 46 पेड़ों को विरासत में दर्ज किया जाएगा। वन विभाग की ओर से इन पेड़ों को चिह्नित कर मुख्यालय सूची भेज दी गई है। जिसमें बरगद के 17, पीपल के 21, पारीजात के 5, पाखर, इमली व कटबर का एक-एक पेड़ शामिल है। लखनऊ स्थित मुख्यालय की टीम द्वारा इन सभी पेड़ों का निरीक्षण किया गया है।
शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों की संख्या में पुराने पेड़ हैं। जिसमें से कई पेड़ पुराने होने के कारण लोगोें की आस्था से भी जुड़े हुए हैं। इन वृक्षों में कई पेड़ आजादी की जंग का इतिहास भी समेटे हुए हैं। देखरेख का अभाव होने के कारण कई पेड़ों का अस्तित्व संकट में है। वहीं कई पेड़ मिटने के कगार पर हैं। पेड़ों का अस्तित्व बचाने के लिए वन विभाग द्वारा सौ साल से अधिक वृक्षों को विरासत में दर्ज किया जा रहा है। विरासत में दर्ज होते ही इन पेड़ों की खास निगरानी वन विभाग द्वारा की जाएगी। जिसके चलते पेड़ों के आसपास की जगह को सुंदर बनाने का भी कार्य किया जाएगा। इनमें झांसी में सबसे अधिक तीस पेड़, ललितपुर में छह और जालौन में दस पेड़ों को चिह्नित किया गया है।
इस संबंध में वन संरक्षक बीआर अहिरवार ने बताया कि मंडल के सौ साल से अधिक पुराने 46 पेड़ों की सूची तैयार कर मुख्यालय को भेज दिया गया है। इसके अलावा मुख्यालय की टीम द्वारा सर्वे भी किया गया है।