झांसी। कोरोना काल में बेरोजगार हुए रेहड़ी-पटरी वालों को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत 10-10 हजार रुपये का ऋण बैंकों के जरिये उपलब्ध कराया गया था। झांसी में दस हजार लोगों ने लिए गए ऋण की अदायगी नहीं की, जिससे बैंकों की दस करोड़ रुपये की रकम फंस कर रह गई है।
कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए लागू किए गए लॉकडाउन से सबसे ज्यादा प्रभावित रेहड़ी-पटरी वाले हुए थे। इनका रोजगार तो छिन ही गया था। साथ ही जमा पूंजी भी घरेलू उपयोग में खर्च हो गई थी। ऐसे लोगों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर भारत पैकेज दिया था, जिसके तहत प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना लागू की गई थी। इस योजना के तहत शहरी क्षेत्र के रेहड़ी-पटरी वालों को बगैर किसी गारंटी के 10-10 हजार रुपये के ऋण का प्रावधान किया गया था। झांसी जनपद में अब तक 14,100 लोग इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। इन सभी लोगों को लिए गए ऋण की अदायगी एक साल में 12 मासिक किस्तों में करनी थी। लेकिन, इनमें से दस हजार लोग ऐसे सामने आए हैं, जिन्होंने कर्ज लेने के कई महीनों बाद भी अदायगी की पहली किस्त भी जमा नहीं की है। इन लोगों पर बैंकों की 10 करोड़ रुपये की रकम फंस गई है। बाकी भी ऋण की नियमित रूप से अदायगी नहीं कर रहे हैं। जबकि, योजना में प्रावधान किया गया है कि जो लोग अपने ऋण की समय से अदायगी करते हैं, वे आवश्यकता पड़ने पर बैंकों से 20 हजार का कर्ज बगैर किसी बैंक गारंटी के ले सकते हैं।
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत बैंक बगैर किसी गारंटी के आसानी से कर्ज उपलब्ध करा रहे हैं। लेकिन, तमाम लोग लिए गए ऋण की अदायगी नहीं कर रहे हैं। जबकि, समय से अदायगी करने पर योजना के तहत वे बीस हजार रुपये ऋण और हासिल कर सकते हैं।
- अरुण कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक