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भूखे रहे मजदूर, ढूंढते रहे रोजी, मनरेगा में डंप रहे दस करोड़ के काम

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झांसी। कोविड-19 के चलते गांव लौटने वाले श्रमिकों की मदद को सरकार ने मनरेगा में मोटी रकम दी लेकिन, मनरेगा अफसरों के नकारापन से समय पर करीब दस करोड़ के कामों के प्रस्ताव ही तैयार नहीं हुए। इसके चलते बड़ी संख्या में समय पर काम शुरू नहीं कराए जा सके। नतीजतन दो वक्त की रोटी के लिए परेशान श्रमिकों को वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा।
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मनरेगा के जरिए श्रमिकों को रोजगार देने की बात तय हुई। अधिक से अधिक मजदूरों को उनके गांव में काम दिए जा सके इसके लिए कन्वर्जेंस के माध्यम से भी काम कराए जाने थे। सरकार ने रेलवे, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग, कृषि महकमे समेत तमाम महकमों को मनरेगा के जरिए काम कराने के निर्देश दिए लेकिन, कौन से काम कराए जाएं यही महकमे तय नहीं कर सके। इस वजह से धन स्वीकृत होने के बावजूद श्रमिकों को इसका फायदा को नहीं मिल सका। मनरेगा अफसरों की बेपरवाही से जिन महकमों को काम कराना था, वह सुस्त पड़े रहे।
कुल 1056 कार्य स्वीकृत हुए लेकिन, आज तक 525 कार्य आरंभ नहीं हुए। उधर, श्रमिकों को जब काम नहीं मिला तब अधिकांश ने यहां से फिर पलायन करना आरंभ कर दिया जबकि सरकार ने इनको गांव में ही बसाने के भी दावे किए थे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सिंचाई विभाग को 224.47 लाख रुपये से कार्य कराने थे लेकिन, वह सिर्फ 58.31 लाख ही खर्च कर सका। इसी तरह पीडब्ल्यूडी के 680.83 लाख के कार्य स्वीकृत हुए लेकिन, वह सिर्फ 167.90 लाख ही खर्च कर सका। कृषि विभाग का 443.86 लाख खर्च करना था लेकिन, वह सिर्फ 91.42 लाख ही खर्च कर सका। अधिकांश मानव दिवस ही सृजित नहीं हो सके।
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मनरेगा के काम में फिसड्डी महकमे
विभाग स्वीकृत धनराशि खर्च मानवदिवस मानव दिवस
(लाख में) (लाख में) (लक्ष्य) (काम दिया)
लघु सिंचाई 192.45 26.64 88648 13254
सपरार प्रखंड 25.06 6.42 12390 3198
बेतवा नहर 42.47 1.46 20527 728
आईडब्ल्यूएमपी296.96 18.48 109604 9195
भूमि संरक्षण मैदानी 113.64 11.44 56091 5692
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