जौनपुर। कोरोना की दूसरी लहर के बाद जिले में मौत का सिलसिला भी शुरू हो गया है। पिछले 48 घंटे के दौरान महिला समेत दो लोगों की मौत हो गई है। दोनों शहर के अलग-अलग मोहल्लों के निवासी थे। महिला की रिपोर्ट मौत के बाद कोरोना पॉजिटिव आई तो युवक पिछले एक सप्ताह से कोविड-19 एल-2 अस्पताल में भर्ती था। 26 फरवरी को कोरोना से सौंवी मौत हुई थी। सवा महीने बाद दो मौतों के साथ आंकड़ा बढ़कर 102 पहुंच गया है।
शहर के वाजिदपुर उत्तरी निवासी व्यापारी (48) की सुतहट्टी में लोहे का कारोबार है। उनकी रिपोर्ट तीन अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव आई थी। इसके बाद उसे महिला अस्पताल के मातृ-शिशु कल्याण केंद्र में बने एल-2 अस्पताल में भर्ती कर दिया गया था। शनिवार को उसकी तबियत बिगड़ गई। कुछ देर बाद ही मौत हो गई। सूचना पाकर परिजनों में कोहराम मच गया। कोरोना से मौत के बाद परिवार और मोहल्ले के लोग सहमे हुए हैं। उधर, शहर के उर्दू बाजार निवासी महिला (40) की तबीयत बिगड़ने पर परिजन आठ अप्रैल की शाम जिला अस्पताल लेकर आए थे। यहां कोरोना जांच के लिए महिला का सैंपल लिया गया था। कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई। मौत के बाद महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। सीएमओ डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि मृतकों के संपर्क में आए परिवार के सभी सदस्यों का भी सैंपल लिया गया है। उसके आसपास के अन्य परिवारों की भी जांच कराई जा रही है।
जौनपुर। कोरोना के कहर से शनिवार को जान गंवाने वाले लोहा व्यापारी के भाई ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एल-2 अस्पताल में समुचित देखभाल नहीं की गई। इसके चलते उनके भाई की मौत हुई है। अंतिम संस्कार के दौरान भी कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन नहीं हुआ। घंटों इंतजार के बाद भी किसी के न पहुंचने पर परिजनों ने खुद पीपीई किट पहनकर अंतिम संस्कार किया।
मृतक के भाई का कहना है कि तीन अप्रैल कोविड अस्पताल में भर्ती होने के बाद भाई से नियमित परिजन संपर्क में थे। शनिवार को सुबह फोन किया गया तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। अस्पताल जाकर पूछताछ की गई तो डॉक्टर ने तबीयत खराब होने की जानकारी दी। कुछ देर बाद बताया गया कि भाई की मौत हो गई है। जब वेंटिलेटर पर न रखने के बारे में जानकारी चाही गई तो बताया गया कि ऑपरेटर न होने से वेंटिलेटर की सुविधा नहीं दी जा सकी। मृतक के भाई का कहना है कि शव को सीधे एंबुलेंस से रामघाट भेज दिया गया। पीछे-पीछे परिजन भी पहुंचे। वहां उच्चाधिगारियों को सूचना देते हुए कोविड प्रोटोकाल के तहत अंतिम संस्कार कराने की मांग की गई। करीब दो घंटे तक कोई नहीं पहुंचा। तब उन्होंने खुद पीपीई किट पहनकर दाह संस्कार किया। इस संबंध में सीएमओ डॉ. राकेश कुमार ने लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मरीज की सतत निगरानी की जा रही है। फिर भी आरोपों की जांच कराएंगे।