बारिश का मौसम शुरू हो जाने के बावजूद पानी की टंकियों की सफाई नहीं की गई है। अब भी दशकों पूर्व बिछी पाइप लाइन से पेयजल की आपूर्ति हो रही है, जबकि जलापूर्ति की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ऐसे में शहरवासी दूषित पेयजल पीने को विवश हैं।
सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में 38 वार्ड हैं। शहर क्षेत्र में करीब 34 हजार मकान है। इन घरों में पेयजल आपूर्ति करने के लिए शहर में नौ पानी की टंकियां हैं। इनमें से दो पानी की टंकियाें से जर्जर होने के कारण जलापूर्ति बंद है। इनमें से एक टंकी कलेक्ट्रेट तथा दूसरी जलकर के भूसा गोदाम के पास है। शहर में वर्तमान में सिर्फ सात पानी की टंकियों से ही पेयजल आपूर्ति होती है। जिसमें जलकल कार्यालय परिसर में दो, पंचहटिया में एक, रूहट्टा में एक, पालिटेक्निक में एक, खरका कालोनी में एक व नईगंज में एक पानी की टंकी मौजूद है। इनसे पूरे शहर में पेयजल आपूर्ति हो रही है। पेयजल आपूर्ति करने के लिए दशकों पूर्व करीब 140 किमी. पाइप बिछाई डाली गई थी। जो जर्जर हो चुकी है। इसके बावजूद उसी पाइप लाइन के जरिए पेयजल आपूर्ति की जा रही है। जानकारी के बावजूद नगर पालिका प्रशासन उदासीन रवैया अपनाए हुए है। पालिका प्रशासन की तरफ से न तो समय से पानी की टंकियों की सफाई कराई गई है और न ही जर्जर पाइप बदलने का कार्य किया जा रहा है। इसके चलते तमाम लोग दूषित पानी पीने को विवश हैं। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार मिश्रा का कहना है कि साल में एक बार पानी की टंकी की सफाई कराई जाती है। मई माह में टंकियों की सफाई करा दी गई है। बारिश में अगर पानी की टंकियों की सफाई कराने की आवश्यकता पड़ेगी तो फिर से सफाई करा दी जाएगी। पेयजल आपूर्ति के लिए दशकों पूर्व पड़ी पाइप जर्जर व पुरानी हो चुकी है। जिसे बदलने के लिए कई बार शासन को पत्र भेजा जा चुका है।