पास-पड़ोस के लोग उसे ढांढ़स बंधाने में जुटे थे, मगर इस मंजर के सामने वह खुद को भी बेबस पा रहे थे। अमर बहादुर की पत्नी इंद्रावती देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। पांच बेटों में विजय, दिनेश, रमेश बाहर रहते हैं। घर पर मौजूद ललई और महेश हादसे की खबर मिलते ही जिला अस्पताल चले गए थे। वहां पहुंचने पर उन्हें पिता के मौत की खबर मिली तो बदहवास हो गए।
दलश्रृंगार के परिवार में भी पत्नी प्रमिला और तीन बेटे अमित, मनीष रमित हैं। हादसे में चौथे मृतक रामकुमार (65) की पत्नी कुटुरा की छह वर्ष पहले मौत हो गई थी। तीन बेटे रामजीत, लालजीत और अमरजीत बाहर रहकर रोजगार करते हैं। पिता के मौत की खबर पाकर वह घर के लिए रवाना हो गए थे।
बेटी सुशीला पिता के गम में बेसुध थी। दोपहर तक गांव में सिर्फ महिलाएं और छोटे बच्चे ही थे। पुरुष सदस्य शव लाने पोस्टमार्टम हाउस गए थे या फिर घायलों के उपचार के लिए अस्पताल में थे।