पूर्व सांसद धनंजय सिंह को लखनऊ की सीजीएम कोर्ट ने भले ही भगोड़ा घोषित कर दिया है, लेकिन ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में भी धनंजय सिंह का दबदबा कायम है। बक्शा में बेलापार गांव निवासी मनोज यादव के सामने सत्ताधारी दल से अधिकृत प्रत्याशी निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख सजल सिंह और सपा की प्रत्याशी विद्या दुबे को मैदान छोड़ने के पीछे भी धनंजय सिंह का ही प्रभाव माना जा रहा है।
38 वर्षीय मनोज यादव बीडीसी सदस्य भी निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2010 में हुए ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में भी धनंजय के प्रयास से ही मनोज यादव की भाभी सुनीता यादव यहां से ब्लॉक प्रमुख चुनी गई थी। मनोज के भाई महेंद्र यादव बक्शा के वार्ड संख्या 25 से जिला पंचायत सदस्य हैं और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में वह नव निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकला धनंजय सिंह के प्रस्तावक भी रहे।
जौनपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर मिली करारी हार को सपा पचा नहीं पा रही है। वहीं, पार्टी में ही भितरघात की संभावनाओं को लेकर तरह-तरह की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक ब्लॉक प्रमुख चुनाव के बाद पार्टी में बड़ी कार्रवाई भी हो सकती हैं। इसके लिए चुनाव पूर्व से लेकर परिणाम घोषित होने के बाद हुए नारेबाजी तक की रिपोर्ट मांगी गई हैं, जिसे तैयार कर प्रदेश अध्यक्ष को भेजी जा रही है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अपनी जीत को लेकर समाजवादी पार्टी आश्वस्त थी। चुनाव के दिन तक पार्टी के सभी विधायक और संगठन के लोग सक्रिय थे। मतदान देने के पहले 39 जिला पंचायत सदस्य सपा के साथ होने का दावा करते हुए उनके कैंप कार्यालय में बैठे थे, लेकिन चुनाव परिणाम में प्रत्याशी की बुरी तरह हार हो गई।
43 प्लस पाने का सपना संजोने वाली सपा की प्रत्याशी निशी यादव को महज 12 मत मिले। इसके बाद पार्टी कार्यालय पर नारेबाजी भी हुई। पार्टी के जिलाध्यक्ष लाल बहादुर यादव ने दावा किया था कि जिला पंचायत सदस्य धनबल, बाहुबली और सत्ता के दबाव के कारण दूसरे के साथ चले गए। उधर सपा का प्रदेश नेतृत्व पूरे घटनाक्रम पर गंभीर है।
सूत्रों की मानें तो संगठन का कहना है कि हारने के बाद भी पार्टी में इस नारेबाजी और रार खुलकर सामने नहीं आती। लेकिन, जौनपुर में इसके विपरीत हुआ। शुरू से चल रहे आरोप-प्रत्यारोप और तरह-तरह की चर्चाओं की शिकायत को अब प्रदेश संगठन ने गंभीरता से लिया है। इसके लिए चुनाव पूर्व से लेकर परिणाम घोषित होने के बाद हुई गतिविधियों और चर्चाओं की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
हालांकि इसी बीच ब्लॉक प्रमुख चुनाव के लिए अधिसूचना जारी हो गई, जिसके कारण प्रदेश नेतृत्व ने कुछ ढील दे दी है। हालांकि इस मामले में जिलाध्यक्ष कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। लेकिन, पार्टी से जुड़े एक जिम्मेदार पदाधिकारी ने बताया कि ब्लाक प्रमुख चुनाव के बाद प्रदेश नेतृत्व को पूरी रिपोर्ट मिल जाएगी। जिसके बाद भितरघातियों के खिलाफ कार्रवाई निश्चित है।