सिकरारा क्षेत्र के सई नदी का जर्जर बरगुदर का पुल।
जिले में सई, गोमती और बसुई नदी पर बने आधा दर्जन पुलों पर सफर जोखिम भरा हो गया है। डायवर्जन के बाद भी भारी वाहनों का गुजरना कम नहीं हुआ है। स्थिति यही रही तो बलिया जैसा हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता। इनमें से कई पुल मुगल काल के हैं। शहर के ऐतिहासिक 438 वर्ष पुराने शाही पुल से पुलिस की शह पर रात में ट्रक गुजारा जाना आम बात है।
शहर के ऐतिहासिक शाहीपुल का निर्माण 1564 में अकबर के शासन काल में चार वर्ष बाद 1568 में बनकर तैयार हुआ था। यह देश का अनूठा पुल है। 438 साल पुराने इस पुल पर भारी वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए दोनों छोर पर गार्डर लगा गया था जिसे तोड़ दिया गया है। खाकीवार्दी वाले चंद रूपयों के लालच में भारी वाहनों को इस पुल से गुजारने में जरा भी संकोच नहीं करते।
जलालपुर में सई नदी पर भी बना शाही पुल जर्जर हो चुका है। इस पुल से भारी वाहन तो नहीं गुजरते लेकिन छोटे मालवाहक वाहन अभी भी गुजरते हैं। पुल पर रेलिंग टूट चुकी है। सई नदी पर रामदयालगंज के पास बना पुल भी भारी वाहनों के गुजरने के दौरान हिलता है।
मछलीशहर-जंघई मार्ग पर बंधवा बाजार के पास बसुही नदी पर बना सैकड़ो वर्ष पुराना पुल जर्जर हो गया है। इसकी रेलिंग टूट गई है। इसके बगल में ही 20 साल पहले नया पुल बनकर तैयार हुआ है लेकिन पुराने जर्जर पुल पर आवागमन को रोका नहीं गया है। मड़ियाहूं तहसील मुख्यालय से तीन किमी दूर भदोही मार्ग पर बसुही नदी पर आजादी के पहले का बना पुल भी जर्जर हालत में है। वहीं दूसरी तरफ बाबा धीरदास- सुजानगंज-बदलापुर रोड पर सई नदी पर बना पुल कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया है।