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खौफनाक कदम: जौनपुर में 3 सगी बहनों ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, नेत्रहीन है मां, पिता की हो चुकी है मौत

Fri, 19 Nov 2021 06:20 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर

सार

जौनपुर में तीन सगी बहनों ने मां की डांट से नाराज होकर आत्महत्या कर ली। तीनों के आत्मघाती कदम उठाने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। खौफनाक कदम उठाने से पहले तीनों बहनों का अपनी मां से विवाद हुआ था। 
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मृतक के घर पर जुटी ग्रामीणों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मां की डांट से नाराज तीन सगी बहनों ने बृहस्पतिवार की रात वाराणसी-सुल्तानपुर रेल प्रखंड पर बदलापुर थाना क्षेत्र के फत्तूपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास ट्रेन के आगे कूद कर जान दे दी। पुलिस जांच पड़ताल में जुटी है। उनकी पहचान मौके से मिले मोबाइल पर आए एक कॉल से हुई ।

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जौनपुर के महाराजगंज थाना क्षेत्र के अहिरौली गांव निवासी स्व. राजेंद्र गौतम की पांच बेटियां रेनू (19), ज्योति (17), प्रीति (16) आरती(14) काजल(11) और एक बेटा गणेश (18) हैं। इसमें रेनू की शादी हो गई है और ज्योति अपनी बुआ के यहां रहती है।

पैसा मांगने पर हुआ था विवाद
बृहस्पतिवार की शाम पांच बजे प्रीति (16), आरती (14) और काजल (11) लकड़ी बीनने गई थीं। आने पर नेत्रहीन मां ने किसी बात को लेकर डांट लगा दी, जो लड़कियों को नागवार गुजरी थी। मां आशा देवी ने बताया कि एक दिन पहले बेटियों ने बुआ कलावती के घर परऊपुर थाना सिंगरामऊ चलने की बात कही थी, किंतु पैसा न होने का हवाला देते हुए उन्होंने मना कर दिया था।

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अगले दिन बृहस्पतिवार रात को खाने के बाद सभी छप्पर में उसके पास ही सो गईं। लेकिन, किसी समय उठकर तीनों घर से निकल गई और रात में ही करीब 20 किमी दूर वाराणसी-सुल्तानपुर रेल प्रखंड पहुंच गईं। जहां फत्तूपुर गेट नंबर 26 के पास रात 11 बजे वाराणसी से लखनऊ जाने वाली गाड़ी नंबर 12325 कोलकाता नंगल डैम एक्सप्रेस के सामने आकर जान दे दीं। 

थानाध्यक्ष बदलापुर संजय वर्मा के मुताबिक ट्रेन के लोको पायलट प्रभाकर कुमार ने हरपालगंज रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर को हादसे की जानकारी दी। वहां की सूचना पर बदलापुर पुलिस रात करीब 12:30 बजे घटना स्थल पर पहुंच गई वहां एक मोबाइल मिला, जिस पर कई कॉल आई थीं। उस नंबर पर बात करने पर तीनों की पहचान हुई और पीड़ित परिवार को सूचना दी गई।

कॉल करने वाला युवक हिरासत में

रात डेढ़ बजे थानाध्यक्ष महराजगंज मृतका के घर पहुंचे। उनके भाई गणेश को लेकर बदलापुर थाने लाकर शवों की शिनाख्त कराई । इस संबंध में सीओ बदलापुर चोब सिंह ने बताया कि घटना की जानकारी रात को पुलिस को हुई। मौके पर गई तो तीनों लड़कियों का क्षत-विक्षत शव मिले। वहीं, खबर है कि लगातार कॉल करने वाले युवक को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। 

बहन ने बताया घर में नहीं है फूटी कौड़ी

अहिरौली गांव निवासी राजेंद्र गौतम का परिवार काफी गरीब है। इस परिवार के लोग कभी-कभी तो भूखे पेट सो जाते थे। वहीं, घटना के बाद शुक्रवार को ससुराल से आई रेनू यह बताते हुए रो पड़ी कि दो दिन पहले बहन प्रीती ने मुझे फोन किया था। बता रही थी कि घर में दाना-पानी और एक फूटी कौड़ी नहीं है।

कैसे पांच परिवार की व्यवस्था की जाए। वह यह बताते हुए रो रही थी। कह रही थी मां अंधी है, किसके घर मजदूरी कंरू। वहीं दूसरी बहन ज्योति ने कहा कि हमसे बात ही नहीं होती है। कभी कभार हालचाल चचेरे भाई महेंद्र द्वारा मिल जाती थी।

साल 2012 में राजेंद्र की टीबी रोग हो जाने के कारण समुचित इलाज न हो पाने के कारण मौत हो गई थी। वहीं आशा पिछले पांच साल से दोनों आंखों से नहीं देख पाती हैं। वह छप्पर में बैठी शुक्रवार को रोते बिलखती रहीं। इस परिवार को सरकारी मदद के नाम पर गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाला सफेद राशन कार्ड मिला है।

जबकि परिवार अन्त्योदय कार्ड के लिए पात्र हैं, जिसमें नि:शुल्क खाद्यान्न मिलता है। इतना ही नहीं, जो राशन कार्ड जारी भी हुआ उसमें तीन यूनिट का खाद्यान्न दिया जा रहा है। ऐसे में आशा बताती है कि 48 रुपये में उसे 15 किलो खाद्यान्न हर माह मिलता है, जिससे लंबा परिवार होने के कारण घर का खर्च तक नहीं चल पाता।
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गरीब परिवार को शौचालय तक का लाभ नहीं मिला

ऐसे में काजल, आरती और प्रीती ही अपनी बड़ी बहन रेनू के साथ मिलकर लोगों की खेतों में काम करके परिवार का खर्च चलाती थी। रेनू की शादी होने के बाद तीनों बहनों के कंधों पर यह जिम्मेदारी आ गई। हालांकि आशा को 500 रुपये विधवा पेंशन के तौर मिलती है। इस गरीब परिवार को शौचालय तक का लाभ नहीं मिला है। हालांकि पीएम आवास का लाभ अब मिला है, जो अधूरा है। आशा देवी के नाम पर छह डिसमिल जमीन है,

जिसपर वह छप्पर डालकर रहती हैं। मौजूदा समय में घर के भीतर मात्र दस किलो अनाज, टूटे पुराने रोजमर्रा के बर्तन ही दिखे। हालांकि घटना की जानकारी मिलने पर हल्का लेखपाल संदीप जायसवाल मौके पर पहुंचे, जो वहां का हालत देख अपनी जेब से गोपनीय  सहायता भी किए। साथ ही एसडीएम बदलापुर लालबहादुर और तहसीलदार मृदुला दुबे को भी वहां की स्थिति के बारे में फोन द्वारा अवगत कराए। 
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