फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्कूल में पहले जैसी नहीं रही आजादी

विज्ञापन
केराकत के पब्लिक इंटर कालेज में छात्राओं को पढाते शिक्षक। - फोटो : JAUNPUR
विज्ञापन
जौनपुर। कोरोना संक्रमण के कारण सात माह स्कूल खुल गए हैं। स्कूलों में पढ़ाई भी शुरू हो गई, लेकिन परिसर में वह माहौल नहीं रहा जो कोरोना के पहले था। लंच की घंटी बजते ही छात्रों का खेल के मैदान में पहुंच जाना, एक साथ समूह में बैठकर लंच करने का दौर खत्म हो गया। स्कूलों में पहले जैसी आजादी नहीं रही। अब तो बस दूर से औपचारिकता पूरी करनी मजबूरी बन गई है। हर जगह दो गज दूरी बनाने की हिदायत दी जा रही है। हालत यह है कि किसी को छूकर बात भी नहीं कर सकते। कोरोना के बाद माहौल में आए बदलाव से छात्रों में वह उत्साह नहीं रह गया है जो पहले था।
विज्ञापन

श्रेया विश्वकर्मा ने बताया कि स्कूल में हर रोज लंच की घंटी लगने का इंतजार रहता था। घंटी बजते ही सभी दोस्त एक जगह इकट्ठे हो जाते थे। एक साथ बैठकर लंच करते थे। सभी लोग एक दूसरे के साथ मिल बांटकर खाते थे, लेकिन अब हालत यह है कि कोई किसी को छूने से परहेज कर रहा है। दूसरे का खाना लेना तो दूर की बात है। इरफान ने बताया कि विद्यालय में प्रवेश करते ही शासन की गाइड लाइन का अनुपालन शुरू हो जा रहा है। थोडा से इधर उधर होने पर शिक्षक के साथ विद्यालय के स्टाफ भी टोकने लग रहे हैं। जिसके चलते छात्रों के बीच दूरी बन गई है। हर समय इस बात का ध्यान रखना पड रहा है कि कहीं कोई गलती तो नहीं कर रहे हैं। वहीं, गौरव कुमार ने कहा कि कोरोना संक्रमण के पहले शिक्षकों के मना करने के बाद भी दोस्तों के साथ खेलना साथ में बैठकर बातें करते रहते थे। लेकिन अब तो बिना मना किए ही दूरी बन गई है। क्लास से लेकर खेल के मैदान, लंच और बाहर खडे होकर बात करने पर प्रतिबंध लग गया है। थोडी सी गलती होने पर शिक्षकों की डाट पड रही है। सलमान अली ने बताया कि कोरोना को लेकर सभी के मन में इतना भय है कि खुद एक दूसरे से दूरी बनाए हुए हैं। दोस्तों के बीच इतनी दूरी बन गई है कि न तो पढाई करने का मौंका मिल रहा है और न ही उनसे अपनी कोई बात शेयर कर पा रहे हैं। हर जगह दूरी बनाए रखने का निर्देश सुनने को मिल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें