जौनपुर। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले हजारों परिवार मुश्किल में हैं। उन्हें ई-पॉस मशीन से ही राशन दिया जा रहा है जबकि देश भर में बायोमेट्रिक सत्यापन पर रोक लग गई है। राशन लेने वालों की मुश्किल यह है कि कोरोना से बचाव में वे अंगूठा नहीं लगाना चाहते और ऐसा नहीं करने पर राशन का संकट पैदा हो जाएगा। जिला आपूर्ति विभाग के दलील है कि उन्हें अब तक कोई निर्देश नहीं मिला है, इसलिए पुरानी व्यवस्था लागू रखी गई है।
जिले में सात लाख 93 हजार 730 राशन कार्ड धारक हैं। जिसमें एक लाख 25 हजार 472 अंत्योदय व छह लाख 68 हजार 258 पात्र गृहस्थी राशन कार्ड धारक हैं। इनको 2107 कोटे की दुकानों से राशन दिया जाता है। कोरोना के फैलने के बाद देश के सभी कार्यालयों से बायोमीट्रिक हाजिरी बंद कर दी गई है। पर जिला पूर्ति विभाग ने अपनी प्रणाली नहीं बदली है। यह स्थिति तब है जबकि मुख्यमंत्री ने कोरोना के मद्देनजर हर जरूरतमंद तक राशन पहुंचाने की बात कही है। मगर जिला पूर्ति विभाग कोरोना के प्रति उदासीन बना हुआ है। कोटे की दुकानों पर ई-पॉस मशीन से बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही राशन दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि कोरोना से बचाव के लिए एहतियात बरतें तो परिवार भूखों मर जाएगा।
सरकार से कोई नया दिशा निर्देश नहीं आया है। पहले की ही भांति ई-पॉस से कार्डधारकों को राशन का वितरण किया जा रहा है। सरकार से नया दिशा निर्देश आने के बाद उसके अनुसार राशन कार्ड धारकों को राशन का वितरण किया जाएगा। - अजय प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी