शहर में गोमती नदी पर बने ऐतिहासिक शाही पुल के मध्य में दो पिलर के बीच लखौरिया ईंट से बनी दीवार को तोड़कर रातों रात मूर्ति रखने की सूचना पर मंगलवार को पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंचे पुलिस और पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने मौके की छानबीन की। पुरातत्व विभाग के कनिष्ठ कंस्ट्रक्शन सहायक जे राजू का कहना है कि जिस तरह से पुल के दो पिलर के बीच बनी ईंट की दीवार को तोड़ा गया है, उससे पुल का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
मंगलवार की सुबह कुछ स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी कि शाही पुल के मध्य में स्थित दो पिलर के बीच की जगह जो लखौरिया ईंट से बंद की गई है उसे रात में किसी शरारती तत्व ने तोड़ दिया है। सूचना पर कोतवाली प्रभारी संजीव मिश्रा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पाया कि टूटी हुई दीवार के अंदर देवी की खंडित प्रतिमा रखी गई थी। मौके पर पहुंचे पुरातत्व विभाग के कनिष्ठ कंस्ट्रक्शन सहायक जे राजू जांच पड़ताल के बाद बताया कि यह मूर्ति अभी कुछ वक्त पहले ही यहां रखी गई है। पुलिस ने इसी स्थान पर मां काली की मूर्ति होने का दावा करते हुए नमामि गंगे योजना के तहत मंदिर का भी जीर्णोद्धार किए जाने की मांग को लेकर हाल ही में डीएम को पत्रक सौंपने वालों से भी पूछताछ की। लेकिन दीवार तोड़ने वालों का पता नहीं चल सका। कोतवाली प्रभारी संजीव मिश्रा का कहना है कि पुल के नीचे मंदिर होने का दावा करते हुए उसका जीर्णोद्धार कराने की मांग करने वालों का कहना है कि उन्होंने इस बात की मांग प्रशासन से जरूर की है लेकिन दीवार उन्होंने नहीं तोड़ी है। कोतवाली प्रभारी संजीव मिश्रा का कहना है कि शाही पुल के दो पिलर के बीच पुरानी दीवार तोड़ने का मामला गंभीर है। इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड को अधिशासी अभियंता राधाकृष्ण का कहना है कि शाही पुल दुद्धी-लुंबनी मार्ग पर है और यह मार्ग अब एनएच को स्थानांतरित कर दी गई है। लिहाजा शाही पुलिस के देखभाल की भी जिम्मेदारी अब एनएच की होगी। पुल के मध्य दो पिलर के बीच दीवार टूटने की सूचना मिली थी जिससे एनएच के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।