उनकी कलात्मक उत्कृष्टता भी गजब की है। इन धरोहरों को संरक्षित करने के लिए पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन ले रखा है। हर स्थल के बाहर घेरेबंदी कर बड़े-बड़े बोर्ड तो लगा दिए गए हैं, लेकिन उनके संरक्षण की कोशिश नहीं हो रही। मुगल काल में बने अपने तरह के अनूठे शाही पुल की दीवारों पर पीपल उग गए हैं।
पुरानी बाजार में एक कोने में बनी चार अंगुल मस्जिद तक अतिक्रमण के चलते पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। पुरातत्व महत्व के इन स्थलों के सौ मीटर के दायरे में किसी भी तरह का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है, मगर आसपास धड़ल्ले से नई इमारतें तनती जा रही हैं। अटाला और चार अंगुल मस्जिद वाले इलाके में तो दस मीटर की दूरी पर ही कई नए निर्माण कराए गए हैं।
यही हाल सिपाह स्थित फिरोज शाह मकबरा, इमामबाड़ा, बड़ी मस्जिद और अन्य स्थलों का भी है। शाही किला में भी देखरेख का अभाव है, क्योंकि जगह-जगह इमारत की ईंटें खराब हो रही हैं, जगह-जगह बांस बल्ली लगाकर किले की खुबसूरती पर दाग लगा दिया है, वह भी टूटकर पड़े हैं।
डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि सीआरओ से कह दिया है। शाही पुल में उगे पौधों को संबंधित विभाग से बात करके कटवाना सुनिश्चित करें। शाही किले में बांस लगे हैं, उसे दिखवाया जाएगा और काम करवाया जाएगा।
सीआरओ रजनीश राय ने कहा कि एनएचआई के अधिकारियों को पौधा कटवाना है। इसके लिए उनसे मेरी बात हो गई है। जल्द ही पौधा कटवाने के साथ ही उसमें केमिकल भी डलवाया जाएगा, ताकि पौधे की जड़ भी खत्म हो जाए। वहीं, शाही किला को और सुंदर बनाया जा एगा। इसके लिए फसाड लाइट लगवाई जाएंगी, जिसकी तैयारी चल रही है।