जिले की चार तहसीलों के भवनों का निर्माण 2007 से चल रहा है। मगर, कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने काम बीच में ही छोड़ दिया है। शासन स्तर से वर्ष 2016 से चल रही एसआईटी जांच के चलते निर्माण अधूरा रह गया। फिलहाल तेज निर्माण की गति तेज कर दी गई है। मार्च 2025 तक इसे पूर्ण करने का लक्ष्य है।
मछलीशहर, केराकत, मड़ियाहूं और शाहगंज तहसील के जर्जर भवनों की जगह 2007 में नए भवन बनाए जाने थे। निर्माण का जिम्मा राजकीय निर्माण निगम वाराणसी को दिया गया। शासन की ओर से पैसा कार्यदायी संस्था को सीधे खाते में दे दिया गया। पूरा भुगतान भी हो गया। निर्माण कार्य 2007 से 2018 तक धीमी गति से चलता रहा। निर्माण सामग्री का दाम बढ़ने से खर्च भी बढ़ गया। फिर संस्था ने निर्माण कार्य बीच में ही छोड़ दिया। इसके पूर्व 2016 में ही निर्माण में मानक की अनदेखी की शिकायत को लेकर शासन स्तर से निर्माण कार्य की एसआईटी जांच शुरू करा दी गई। जांच पूरी होने के बाद काम शुरू कराया गया।
मड़ियाहूं, केराकत, मछलीशहर तहसीलों में 2007 से तो शाहगंज में 2011 से काम चल रहा है। मड़ियाहूं में 3.38 करोड़ की लागत से हो रहा काम 85 फीसदी, शाहगंज में 4.10 करोड़ की लागत से चल रहा रहा काम 83 फीसदी, मछलीशहर में 3.44 करोड़ की लागत से हो रहा काम 80 फीसदी, केराकत में 3.48 करोड़ की लागत से हो रहा काम 42 फीसदी ही हुआ है। इसमें सबसे खराब प्रगति केराकत तहसील की है।