करंजाकला (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में रिजल्ट गड़बड़ी और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर हुए छात्र प्रदर्शन के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जहां पहले छात्रों की मांग मानते हुए बिना परीक्षा शुल्क लिए मूल्यांकन कराने का आश्वासन दिया था, वहीं अब पांच छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात कार्यदिवस में जवाब मांगा गया है। इस कार्रवाई के बाद छात्रों में रोष है। उन्होंने प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। आठ अप्रैल को बिना पूर्व सूचना के बड़ी संख्या में छात्र विभिन्न मांगों को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए थे। स्थिति को देखते हुए पांच थानों की पुलिस फोर्स के साथ डिप्टी एसपी, सीओ सदर और एसडीएम मौके पर पहुंचे थे। उस समय विश्वविद्यालय परिसर में काफी देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि धरने के कारण नियमित शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य पूरी तरह बाधित हो गए थे। प्रशासनिक भवन में भारी भीड़ जमा होने से अधिकारियों के महत्वपूर्ण शासकीय कार्य प्रभावित हुए, जिसे सरकारी कार्य में हस्तक्षेप की श्रेणी में माना गया है। प्रशासन का यह भी दावा है कि विभिन्न जनपदों से आए प्रबंधकों, कर्मचारियों और दूर-दराज से पहुंचे छात्रों को मानसिक व शारीरिक असुविधा का सामना करना पड़ा।
प्रशासन के अनुसार वार्ता के लिए पहुंचे जिम्मेदार अधिकारियों के साथ कुछ छात्रों द्वारा अभद्र भाषा और व्यवहार किया गया, जो छात्र गरिमा के खिलाफ है। इसी आधार पर विश्वविद्यालय ने पांच छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात कार्यदिवस के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस पाने वाले छात्रों में सिद्धार्थ सिंह, शिवांश त्रिपाठी, शंभू चौरसिया और मंगलम त्यागी समेत पांच छात्र शामिल बताए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य छात्रों की पहचान की जा रही है और उन्हें भी नोटिस भेजने की तैयारी है। इस कार्रवाई के बाद छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि छात्रों की जायज मांगों को दबाने के लिए प्रशासन दमनात्मक कार्रवाई कर रहा है। छात्रों का आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई से उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है ताकि भविष्य में वे अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलन न कर सकें।