सिद्धिकपुर में बन रहे उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण 8 साल बाद भी पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। उसके पीछे शासन की तरफ से रिवाइज रेट नहीं मिलना कारण बताया जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारी काम नहीं पूरा होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। महिला छात्रावास समेत दस भवनों के निर्माण में कटौती कर दी गई।
प्रधानाचार्य डा. शिवकुमार का कहना है कि एमबीबीएस प्रथम वर्ष की कक्षाएं किसी तरह संचालित की जा रही हैं। लेकिन दूसरे वर्ष के लिए अभी बिल्डिंग पूरी तरीके से बनकर तैयार नहीं है। जबकि कुछ ही महीने बाद एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की भी कक्षाएं संचालित होनी हैं। पूर्वांचल की सबसे महत्वपूर्ण योजना में से एक उमानाथ सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज का कार्य अभी महज 54 फीसदी ही हो सका है। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने मेडिकल कॉलेज की लागत न बढ़ाने पर शासन से सवाल उठाया तो महिला छात्रावास समेत 10 भवनों के निर्माण में ही कटौती कर दी गई। ऐसे में महिला छात्रों की समस्या बढ़ गई है। प्रथम वर्ष की छात्राएं सीनियर बॉयज के छात्रावास में रह रही हैं। इसके अलावा सर्विस ब्लॉक, शॉपिंग कंपलेक्स, एनिमल हाउस, कैंटीन, कमेटी सेंटर, गेस्ट हाउस, ऑडिटोरियम,स्कूल बिल्डिंग, टाइप वन के 28 आवास टाइप 2 के 100 आवास, टाइप 3 के 52 आवास और टाइप 4 के 32 आवासों में कटौती की गई है। साथ ही इसके क्षेत्रफल में भी कटौती की गई है। पहले उमानाथ सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण 1 लाख 64 स्क्वायर मीटर में होना था। लेकिन अब 1 लाख 32 हजार स्क्वायर मीटर में कराया जा रहा है। शासन स्तर पर डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ के अध्यक्षता में बनी समिति ने वर्ष 2019 और 2021 में दो बार कटौती की। जिसका कारण यह बताया जा रहा है कि भवनों के निर्माण में जीएसटी लागू होने के बाद पुनरीक्षित बजट नहीं बढ़ने की बात कही जा रही है। महिला छात्रावास की भूमि ऐसे ही पड़ी है ऐसे में एमडी करके निकलने वाले सीनियर रेजिडेंट चिकित्सकों के छात्रावास में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्राओं को रखा गया है। जबकि टाइप 4 में डॉक्टरों के लिए बने आवास पहले 48 थे बाद में 16 भवनों की कटौती कर बाई 32 कर दिया गया जो अभी भी तैयार नहीं हो सके हैं। ऐसे में चिकित्सक बाहर रूम लेकर रहने को मजबूर हैं। राजकीय निर्माण निगम के अधिकारी की मानें तो टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड की तरफ से बार-बार धनराशि बढ़ाने की बात कही जा रही। बीच में कई बार काम बंद। मजबूर होकर वर्ष 2021 में निर्माण निगम में टाटा कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करके 30 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था। बाद में किसी तरह बात बनी और कंपनी ने दोबारा काम शुरू किया। प्रधानाचार्य डा. शिव कुमार ने बताया की शासन स्तर और टाटा समूह के मैनेजर से बात चल रही है कि एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिए बिल्डिंग तैयार करा दी जाए।
शासन द्वारा महानिदेशक स्तर के अधिकारियों के अध्यक्षता में बनी समिति में महिला छात्रावास समेत दस बिल्लियों की कटौती की गई है। इसके लिए दो बार 2019 और 2021 में बैठक में निर्णय लिया गया था। शुरुआत में बजट न मिलने के कारण काम रुका तो अब महंगाई बढ़ने से इसकी लागत बढ़ गई। शासन स्तर से सिर्फ 2 साल से आश्वासन दिया जा रहा है कि रिवाइज रेट जल्द आपको मिल जाएगा। आश्वासन के आधार पर कार्य करने वाली टाटा फार्म की तरफ से निर्माण कार्य में देरी की जा रही। 554 करोड़ की परियोजना में केवल 379 करोड़ ही मिला है। --एई राकेश कुमार सिंह राजकीय निर्माण निगम