जौनपुर। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने एक अभिनव प्रयास किया है। परिसर के 2700 से अधिक पेड़ों पर क्यूआर कोड लगाया है। कोड स्कैन करते ही उस पेड़ की उम्र, उसकी खासियत और उसके परिवार यानी वृक्ष श्रेणी का नाम आ जाएगा। पेड़ों के संरक्षण की जिम्मेदारी छात्रों को मिली है, नए पेड़ लगाने और संरक्षण करने वाले आंतरिक मूल्यांकन में अतिरिक्त अंक देने की व्यवस्था की गई है।
यह अभियान ग्रीन कैंपस के तहत विश्व विद्यालय प्रशासन ने शुरू किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कुल 64 तरह के पेड़ लगाए गए हैं। इनमें से कुछ काफी पहले से लगाए गए हैं। सभी पेड़ों को जियोटैग कर दिया गया है। छात्रों को प्रेरित किया जा रहा है। छात्रों को यह बताया जा रहा है कि वह अपने जन्म दिन पर एक पौधा लगाएं और बड़ा होने तक उसकी निगरानी करें। बड़ी संख्या में छात्र इस अभियान से जुड़े हैं। इससे कैंपस हरा भरा दिखाई दे रहा है। परिसर में जो भी खाली स्थान पड़ा है। वहां पेड़ लगाए जाएंगे। संवाद
इनसेट-
पौधे लगाओ नंबर पाओ
जौनपुर। विश्वविद्यालय परिसर के छात्रों को ग्रीन कैंपस बनाने के लिए जोड़ जा रहा है। प्रोत्साहन स्वरूप इन छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन में 5 अतिरिक्त अंक दिया जा रहा है। इससे काफी संख्या में छात्र जुड़ रहे हैं। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। बताया गया कि यह अभियान आगे भी चलता रहेगा।
कई पेड़ों का है औषधीय महत्व
विश्वविद्यालय परिसर में लगाए गए पेड़ों में से कई के औषधीय महत्व है। कुछ पेड़ों की पत्तियां तो कुछ के छाल को औषधि के रूप में उपयोग में लाया जाता है, कुछ पेड़ों के फल मानव जीवन के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। परिसर में लगाए पेड़ों में नीम, आंवला, तुलसी, गुरुच, जामुन, पीपल, बर्गद. अंजीर, अशोक, आम, शीशम के अलावा फूल वाले पेड़ों की कई प्रजातियां लगाई गईं हैं।
विश्वविद्यालय परिसर को ग्रीन कैंपस बनाने के लिए अभियान चल रहा है। इसके तहत अब तक 2760 पेड़ लगाए जा चुके हैं। जिन पर क्यूआर कोड़ लगा दिया गया है। क्यूआर कोड से उस पेड़ के इतिहास का पता चल चल जाएगा। छात्रों को पांच अंक आंतरिक मूल्यांकन में देकर प्रोत्साहित किया जाता है।- डा. राजकुमार सोनी, प्रभारी ग्रीन कैंपस