देश तेजी से बदल रहा है। लड़कियां शिक्षा के साथ खेल, सेना, अंतरिक्ष समेत सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। यही असली सशक्तिकरण है। युवा नवाचार के लिए तैयार हैं। उन्हें आगे लाना होगा। जरूरत इस बात की है कि उनकी उर्जा को देश के विकास में लगाया जाए। 21वीं सदी विज्ञान की सदी है। युवा शक्ति के कौशल को बढ़ाने में शिक्षण संस्थाएं अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उच्च शिक्षा में गुणवत्ता से ट्रेंड बदलेगा। कौशल आधारित शिक्षा से शिक्षा के क्षेत्र में सुधार होगा। साथ ही युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेगें। शोध को स्थानीय स्तर प्राथमिकता देनी होगी। नई शिक्षा नीति से काफी बदलाव आया है। नैक के लिए शिक्षण संस्थाओं को तैयार रहना होगा।
मुख्य अतिथि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश्वर मिश्र ने कहा कि भारत ऋषियों-मुनियों की कर्मभूमि रही है। दीक्षा ग्रहण करने के बाद जीवन के हर क्षेत्र में शिक्षा की उपयोगिता को साबित करें, यही हमारी शुभकामनाएं है। आज उर्जा और ज्ञान के अक्षय भंडार है। आप को इसका सकारात्मक और सर्जनात्मक उपयोग देश और समाज की उन्नति के लिए करना है। आप कौशल, ज्ञान और अनुसंधान का उपयोग करें। पर्यावरण संरक्षण के लिए तैयार रहना होगा। कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने अतिथियों का स्वागत किया।