जौनपुर। राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डिहिया से बर्खास्त सहायक अध्यापिका दीप्ति के मामले की जांच कर रहे क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर ने वहां के प्रधानाचार्य से पूछताछ की। प्रधानाचार्य ने दीप्ति का मोबाइल नंबर देने में असमर्थता जताया तो उन्हें दो दिन का मौका दिया गया है। दो दिन बाद भी मोबाइल नंबर उपलब्ध न कराने पर फर्जी नियुक्ति के खेल में उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में आ सकती है।
फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों पर नौकरी कर रही दीप्ति को बर्खास्त कर जिला विद्यालय निरीक्षक ने उसके खिलाफ 18 जून को शहर कोतवाली में केस दर्ज कराया था। इस मामले की जांच पहले कोतवाली पुलिस कर रही थी बाद में इसकी विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। क्राइम ब्रांच ने अब छानबीन शुरू की तो पहले दीप्ति का मोबाइल नंबर की तलाश की जा रही है।
हैरत की बात है कि जिस स्कूल में उसने कई साल तक शिक्षण कार्य किया उसी स्कूल के प्रधानाचार्य ने शिक्षिका का मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई है। नियुक्ति के समय दीप्ति ने अपना जो अस्थाई पता दिया था वह फर्जी निकला। जिससे उसकी तलाश करने में कई तरह की मुश्किलें आ रही हैं। इंस्पेक्टर क्राइम ब्रांच वीरेद्र बरवार का कहना है कि मोबाल नंबर उपलब्ध कराने के लिए प्रधानाध्यापक को दो दिन का समय दिया गया है। अगर नंबर उपलब्ध नहीं कराए तो फर्जी शिक्षिका की नियुक्ति के खेल में उनकी भी भूमिका संदेह के घेरे में होगी।