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कविता जीवन प्रेम और कवि के हृदय से सृजित विचार: प्रो. निर्मला

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जौनपुर। पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने कविता को विस्तार से परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि कविता जीवन, प्रेम और कवि के हृदय से सृजित विचार है। यह सर्जना भी है। समय के साथ काव्य लेखन की विधा भी बदलती रहती है।
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प्रो. निर्मला एस मौर्य विवि में साहित्यिक विधाओं का सृजनात्मक लेखन विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थीं। यह आयोजन तमिलनाडू केंद्रीय विश्वविद्यालय तिरवारूर के हिंदी विभाग की ओर से ऑनलाइन किया गया था। उन्होंने कहा कि कविता समाज की बात को संप्रेषित करती है। बाबा नागार्जुन की कविता
‘कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास, कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास,
कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त, कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त।’
का उदाहरण देते हुए उन्होंने कविता की सृजनात्मकता और रचनात्मकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। मीडिया का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समाचारों का सामाजिक सरोकार होना चाहिए। विज्ञापन में कुछ ही शब्दों में सबको प्रभावित करने की कला होती है। यह शब्द सृजन और विचार की रचना से ही पनपते हैं। कार्यशाला में स्वागत भाषण और मुख्य अतिथि का परिचय हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. पी राजारत्नम ने किया। अध्यक्षीय उद्बोधन कुलसचिव प्रो. सुलोचना शेखर तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय तिरवारूर ने किया। मौके पर प्रो. देवराज सिंह, डा. रसिकेश, डा. सुनील कुमार, डा, जगदेव, प्रो. सत्य प्रकाश पाल, डा, मनोज कुमार सिंह, डा. सुमित्रा शर्मा, डा. डाली मौर्य, दिव्या रंजन गिरि, डा. मनीष कुमार गुप्त मौजूद रहे।
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