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कोरम पूरा करने के लिए लगा दिए पौधे, सुरक्षा राम भरोसे

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केराकत विकास खण्ड में पिछले वर्ष लगाए गये पौधे सूखे। संवाद - फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए भले ही हर साल अभियान चलाकर करोड़ों रुपये खर्चकर पौधरोपण किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से यह परवान नहीं चढ़ पा रहा है। कारण पौधों को लगाकर रामभरोसे छोड़ दिया जाता है। उनकी सुरक्षा का कोई पुुख्ता इंतजाम नहीं किया जाता है। इससे हर साल तकरीबन 20 से 25 फीसदी पौधे सूख जाते हैं, जो पर्यावरण प्रदूषण को समाप्त होने पर ग्रहण लगा रहे हैं।
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पेड़ पौधों से जहां पर्यावरण प्रदूषण समाप्त होता है। वहीं यह लोगों के जीविका का साधन भी बनते हैं गरीब तबके के लोग बरगद, पीपल और पाकड़ आदि घने पेड़ों के नीचे चाय और पान की दुकान खोलकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। वहीं, ठेले-खमोचे वालों को भी इन पेड़ों के नीचे पनाह मिलती है। कारण आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने से वह किराए पर दुकान लेने में असमर्थ रहते हैं, जिससे वह इन पेड़ों के नीचे दुकान चलाकर अपना और अपने परिवार को जीविकोपार्जन करते हैं। ऐसे पेड़ों को जिम्मेदार लगाने का कार्य तो करते हैं, लेकिन कहीं रेलवे लाइन के किनारे तो कई तालाबों और नहरों के किनारे लगाते हैं। इससे ऐसे पेड़ों का लोगों को फायदा नहीं मिल पाता है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले साल अभियान चलाकर तकरीबन सात करोड़ रुपये खर्चकर 48 लाख 81 हजार पौधे लगाए गए थे। इन पौधों को वन विभाग सहित कुल 28 विभागों की ओर से लगाया गया था। इन पौधों को कहीं रेलवे लाइन, सड़कों के किनारे, नदियों और तालाबों के किनारे सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगाया गया था, लेकिन इन पौधों को खुले में ही लगाकर छोड़ दिया गया। हालत यह हुई कि अब तक तकरीबन 20 से 25 फीसदी पौधे सूख गए हैं। लगभग पौधों के सूखने का यह हाल हर साल रहता है, लेकिन जिम्मेदार इनकी सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।
इस साल 53.12 लाख लगाए जाएंगे पौधे
जौनपुर। इस साल भी जुलाई में अभियान चलाकर 53 लाख 12 हजार 72 पौधे लगाने की तैयारी चल रही है, जिसमें अमरूद, शीशम, इको लिप्टस, कटहल, अर्जुन, पाकड़, पीपल, बरगद आदि के पौधों लगाने का कार्य किया जाएगा, जिसके लिए अभी से गड्ढा खोदने का कार्य शुरू कर दिया गया है। इन पौधों को लगाने की जिम्मेदारी वन विभाग सहित कुल 28 विभागों को दी गई है, जिसमें वन विभाग को 1579848, ग्राम्य विकास को 2150120, राजस्व को 243320, पर्यावरण को 234416, जलशक्ति को 8400, पंचायती राज को 243320, आवास विकास को 6300, औद्योगिक विकास को 2800, नगर विकास को 23660, लोक निर्माण को 8400, रेशम को 25350, कृषि को 412300, पशुपालन को 6300, सहकारिता को 9800, उद्योग को 7700, विद्युत को 3780, माध्यमिक शिक्षा को 4900, बेसिक शिक्षा को 4900, प्राविधिक शिक्षा को 5600, उच्च शिक्षा को 21420, श्रम को 2520, स्वास्थ्य को 7560, परिवहन को 2520, रेलवे को 15280, रक्षा को 5460, उद्यान को 269780, पुलिस और गृह विभाग को 6300 पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है।
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बरगद और पीपल के पेड़ के नीचे 40 और 57 साल से लगा रहे दुकान
मीरगंज/मुंगराबादशाहपुर। क्षेत्र के जरौना सटेशन के पास मौजूद विशालकाय बरगद के पेड़ के नीचे करियांव गांव निवासी अफजल (65) 40 साल से जूून पर ही बैठकर लोगों के बाल और दाढ़ी बनाने का कार्य कर रहे हैं। इससे होने वाले आय से अपना और अपने परिवार को भरण पोषण भी कर रहे हैं। उनके परिवार में पत्नी सहित तीन बच्चे हैं। मुंगराबादशाहपुर रेलवे स्टेशन के पास मौजूद विशालकाय पीपल के पेड़ के नीचे पकड़ी निवासी रामअवध पटेल 57 साल से चाय, पान समोसे बेचकर जीविकोपार्जन करते हैं। उनका कहना है कि इस दुकान से आसानी से अपना व अपने परिवार का भरण पोषण कर लेते हैं। उनकी मानें तो तकरीबन 200 साल पुराना पीपल का पेड़ है।
पौधों की सुरक्षा के लिए कोई बजट नहीं मिलता है। इसके कारण पौधों की सुव्यवस्थित देखभाल नहीं हो पाती है। इस कारण हर साल 15 से 20 फीसदी पौधे सूख जाते हैं। हालांकि पौधों की सुरक्षा के लिए रेंजरों की ओर से अपने-अपने क्षेत्रों में पौधों की देखभाल का कार्य किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर पेड़ों की देखभाल के लिए श्रमिक भी लगाया जाता है। - प्रवीन खरे, प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी
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