गांव में सुविधाएं सीमित थीं और शहर तक भेजने के लिए पैसे नहीं थे। शुरू में लाठी के सहारे तीन बेटों रोहन, रोहित और राहुल को एथलेटिक्स की ट्रेनिंग देनी शुरू की। संभावनाओं को देखते हुए उन्हें जेवलिंग (भाला फेंक) से जोड़ा। पिता की लगन, मेहनत को सार्थक करने में बच्चों ने भी कसर नहीं छोड़ी।
शुरुआत में गांव-परिवार में विरोध भी हुआ, लेकिन वह डिगे नहीं। धीरे-धीरे बच्चे बड़े हुए और उनकी प्रतिभा निखरकर सामने आई तो उन्हें घर पर ही खेल के हर संसाधन उपलब्ध कराया। आज राहुल नेशनल, रोहित इंटरनेशनल और रोहन अंडर-16 के भाला फेंक में अलग पहचान बना चुका है। उम्मीद है कि तीनों बच्चे देश के लिए ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड जीतकर लाएंगे।
सभाजीत अपने तीन बेटों को भाला फेंक में स्टेट, नेशनल और इंटरनेशनल तक पहुंचा चुके हैं। जिनमें इंटरनेशनल तक पहुंचे रोहित की निगाहें साल 2022 में होने वाले एशियन गेम और राष्ट्रमंडल और 2024 में होने वाले ओलंपिक पर है।
वहीं, रोहित की प्रतिभा को देखते हुए रेलवे ने भी अपना लिया। टीडी कालेज जौनपुर से प्राइवेट बीए कर रहे रोहित पिछले 11 महीने से बीएलडब्लू में सीनियर क्लर्क की नौकरी कर रहे हैं।