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तेल में तेजी आने से डेढ़ गुना बढ़ा सरसो की खेती का रकबा

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जौनपुर। कमरतोड़ महंगाई से आम जनता परेशान है। खाद्य तेल की कीमत 180 से 200 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। ऐसे में इस साल किसानों ने सरसों की बोआई लक्ष्य से अधिक कर डाली है। किसानों का कहना है कि सरसों का तेल आसमान छू रहा है। इसे देखते हुए इस साल गेहूं कमकर सरसों की बुवाई बढ़ा दी है। इससे जिले में सरसों की फसल का करीब डेढ़ गुना रकबा बढ़ गया।
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खाद्य तेल की कीमतों में तेजी आने से किसान सरसों की खेती पर जोर दे रहे हैं। जिले में इस साल सरसों की फसल का लक्ष्य 3921 हेक्टयर निर्धारित था, लेकिन किसानों ने साढ़े पांच हजार से ज्यादा हेक्टेयर में सरसों की खेती कर डाली। 2020-21 में 3524 हेक्टेयर में सरसों की खेती हुई थी। इस साल कुल रबी की बुआई का लक्ष्य 230269 हेक्टेयर रहा जबकि लक्ष्य से अधिक 231920 हेक्टेयर में बुआई हुई है। इसमें केवल सरसों की खेती 5572 हेक्टयर में हुई है। जिले में मुख्य रूप से गेहूं और धान की खेती होती है। इसके लिए कृषि विभाग की ओर से हर साल रकबा तय किया जाता है। सरसों तेल की आसमान छूती कीमतों ने किसानों को सरसों की खेती करने के लिए मजबूर कर दिया। जो किसान पूर्व के वर्षों में सरसों की खेती नाम मात्र का करते थे, वह इस साल चार से पांच बिस्वा तक की खेती की। सरसों का रकबा बढ़ने की मुख्य वजह खाद्य तेलों की महंगाई को माना जा रहा है। 80 रुपये से 100 रुपये लीटर बिकने वाला खाद्य तेल का भाव 200 रुपये प्रति लीटर से अधिक पहुंच गया है। खाद्य तेल की महंगाई और सरसों का भाव 70 से 75 रुपये तक पहुंचने के कारण किसानों ने सरसों फसल का रकबा बढ़ा दिया है।
सरसों के तेल का दाम बढ़ने से पहले की अपेक्षा सरसों की खेती बढ़ा दी है। बढ़ते हुए सरसों के तेल के दाम से हम सभी परेशान हैं और तेल खरीदने में भी समस्या उत्पन्न होती है, जिसे लेकर पहले की अपेक्षा दो गुना सरसों की खेती की है। इससे महंगा तेल खरीदने से निजात मिलेगा। - राहुल यादव निवासी जंगीपुर कला
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सरसों का रकबा बढ़ने का मुख्य वजह खाद्य तेलों की महंगाई रही। सरसों की खेती से आय में भी फायदा होता है। इसकी वजह से इस बार गेहूं कमकर सरसों की बुआई दो बिस्वा बढ़ा दी है। 80 से 100 रुपये लीटर बिकने वाला खाद्य तेल का भाव 200 रूपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इसकी वजह से इस साल सरसों की खेती दोगुनी कर दी गई। - जंग बहादुर शिकारपुर
खाद्य तेलों की महंगाई और सरसों की कीमत अधिक होने और कम समय में फसल तैयार होने से किसान का रुझान सरसों की फसल के प्रति बढ़ा है। अन्य फसलों की अपेक्षा सरसों की खेती में लागत भी कम आता है। इस साल सरसों की खेती के लिए 3921 हेक्टेयर रकबा निर्धारित किया गया था, लेकिन किसानों करीब 5572 हेक्टेयर में खेती की है। - जयप्रकाश, उप निदेशक कृषि
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