हुसैनाबाद मोहल्ले में लगा घरों से निकला बजबाता पानी।
मच्छर लोगों का खून चूस रहे हैं। शाम होते ही मच्छरों की भिनभिनाहट शुरू हो जाती है। इसका मुख्य कारण शहर की सड़कों एवं गलियों में कूड़े के ढेर और बजबजा रहीं नालियां, प्रदूषित नदी और तालाब हैं।
नगर पालिका परिषद और मलेरिया विभाग कागजों में दवाओं का छिड़काव कर रहे है जबकि लाखों रुपये इसके नाम पर खर्च किया जा रहा है। मलेरिया विभाग में तीन वर्कर होने की वजह से एंटी लारवा का छिड़काव नहीं हो पाता है।
मोहल्लों में जल जमाव, गंदगी और नालों की सफाई नहीं होने से हाल के दिनों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। हर तरफ कचरा पसरा हुआ है। नियम है कि साल में कम से कम दो बार फागिंग होनी चाहिए।
एक ठंड का मौसम शुरू होते और दूसरा मार्च में छिड़काव कराया जाना चाहिए। लेकिन फागिंग के नाम पर कागजी घोड़ा दौड़ाया जा रहा है। हुसैनाबाद में पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने से कुंड बजबजा रहे हैं।
गोमती नदी भी नालों के पानी से बजबजा रही है। नगरपालिका के पास एक ही फागिंग मशीन है जो कभी कभार सड़कों पर दौड़ने के बाद लौट जाती है। किसी भी मोहल्ले में फागिंग मशीन से छिड़काव नहीं होता है।
गांवों में छिड़काव के लिए प्रति ग्राम पंचायत दस - दस हजार रुपये दिया जाता है। जो कागजों में ही एएनएम और प्रधान मिलकर खर्च कर देते हैं। जबकि मशीन भी ग्राम पंचायतों कोे छिड़काव के लिए दी गई है।
मलेरिया विभाग के फाइलेरिया यूनिट की जिम्मेदारी है कि रेगुलर एंटी लारवा का छिड़काव करें। लेकिन 70 की तुलना में तीन कर्मचारी ही इस विभाग में तैनात हैं। डाक्टरों का कहना है कि घर के आस पास पानी एकत्रित नहीं होने देना चाहिए।