जौनपुर। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की प्रदेशीय विद्युत व्यवस्था संबंधी जांच समिति की बैठक शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सभापति दिनेश कुमार गोयल की अध्यक्षता में हुई। समिति ने निर्देश दिया कि प्रमुख स्थानों पर कंट्रोल रूम के नंबर लिखवाएं। बिजली से संबंधित समायाओं को निस्तारण प्रमुखता से हो। बैठक में सभापति व समिति के सदस्यों ने जनपद में ट्रांसफार्मर की मरम्मत, औसत विद्युत आपूर्ति का विवरण, विद्युत उपभोक्ता लोड के अनुरूप ट्रांसफार्मर की स्थिति व उसके रख-रखाव की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। 1912 पर व मीटर रीडिंग से से संबंधित शिकायतों के निस्तारण व कार्यवाही के संंबंध में अधिकारियों से पूछा। सभापति ने कहा कि विद्युत समस्या से संबंधित उपभोक्ता द्वारा प्राप्त शिकायतों का निस्तारण ससमय सुनिश्चित करें। 1912 पर प्राप्त होने वाली शिकायतों के निस्तारण भी प्राथमिकता से हो। ट्रांसफाॅर्मरों के मरम्मत का कार्य भी समय से हो। बिजली निगम के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि ग्रामीण, तहसील व जिला मुख्यालय पर तय समयानुसार आपूर्ति सुनिश्चित करें। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाशत नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिशासी अभियंताओं को निर्देशित कि सभी उपकेंद्रों पर अधिकारियों व लाइन मैनों के नाम व मोबाइल नम्बर सूची चस्पा कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी व विद्युत विभाग के अधिकारी मासिक समीक्षा बैठक करते रहे एवं उपभोक्ताओं के शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करें। खराब ट्रांसफार्मरो को निर्धारित समय के अन्दर परिवर्तित कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि ट्रांसफाॅर्मर की पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखें जिससे शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की कोई परेशानी न होने पाए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के मीटर में खराबी की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।
उनका तत्काल प्रभाव से निस्तारण कराया जाए। उन्होंने खंभों पर फैले केबल से होने वाली दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने के संबंध में जानकारी ली। लाइन लास को रोकने के लिए भी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया। जिलाधिकारी ने कहा कि बैठक में जांच समिति द्वारा जो भी दिशा-निर्देश दिये गये हैं, उसका अनुपालन अधिकारीगण निर्धारित समयावधि में सुनिश्चित करेंगें। बैठक में सदस्य शैलेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ० रतनपाल सिंह, जितेन्द्र सिंह सेंगर, विजय बहादुर पाठक, पुलिस अधीक्षक डॉ कौस्तुभ, मुख्य विकास अधिकारी ध्रुव खाड़िया एवं सभी अधिकारी माैजूद रहे।