जौनपुर। कोरोना का संक्रमण तभी रुकेगा, जब हम सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करेंगे। इसी मकसद से बाहर से घर आने वाले हर शख्स को कम से कम 14 दिनों तक दूरी बनाकर क्वारंटीन में रहने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार और शासन-प्रशासन लगातार इसके पालन की दुहाई दे रहा है, मगर लोग हैं कि मानने को तैयार ही नहीं। उनमें कोरोना का खौफ तो है, लेकिन यह अति विश्वास भी कि उन्हें कुछ नहीं हो सकता। बचाव की उम्मीद भी सिर्फ दूसरों से ही की जा रही है। क्वारंटीन के नियमों की लापरवाही की कई तस्वीरें बृहस्पतिवार को अमर उजाला की पड़ताल में सामने आई। बाहर से आए लोगों को रखने के लिए गांव के प्राथमिक विद्यालयों, पंचायत भवनों में बने क्वारंटीन सेंटर पर एक-दो दिन बाद ही कहीं ताला लग गया है तो कहीं लोग बार-बार घर से आ-जा रहे हैं। ऐसे लोगों को न घर वाले रोक रहे हैं और न ही कोई अन्य। चुनावी साल होने के कारण ग्राम प्रधान भी गंवई मामले में विवाद बढ़ने की आशंका से कोई रिस्क लेने का तैयार नहीं। यह बात अलग है कि उनके रिस्क न लेने से पूरे गांव और आसपास के लोगों के जीवन पर रिस्क बढ़ रहा है।
रखे गए थे नौ लोग, दो दिन में ही हो गए सात
धर्मापुर। क्षेत्र के किरतापुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में बने क्वारंटीन सेंटर में 30 मार्च को दिल्ली, मुंबई, इंदौर, जोधरपुर से आए नौ लोगों को रखा गया था। उनके लिए चारपाई, गद्दा, भोजन आदि का इंतजाम भी किया गया। वर्तमान में सिर्फ सात लोग ही इसमें रह रहे हैं। दो लोग एक अप्रैल को ही घर चले गए। बाकी सात में से भी चार रोजाना मनमाने ढंग से घर आ-जा रहे हैं। सुबह स्नान, भोजन वह घर पर ही करते हैं और फिर कुछ देर के लिए विद्यालय में आ जाते हैं। प्रधान विनोद यादव का कहना है कि इस बारे में सीएचसी पर सूचना दे दी गई है। क्वारंटीन सेंटर में जो लोग हैं, वह भी रोजाना घर जाने की जिद करते हैं। इससे विवाद की स्थिति बन जा रही है। वहीं सीएचसी प्रभारी डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि टीम के साथ गांव में पहुंचकर वहां की स्थिति का जांच करेंगे। नियम तोड़ने वालों के बारे में उच्चाधिकारियों को सूचना दी जाएगी।
एक सेंटर में मिले 11 लोग, बाकी पर ताला बंद
सुईथाकला। बाहर से आए लोगों को गांव में क्वारंटीन करने की व्यवस्था विफल हो गई है। अधिकांश लोग क्वारंटीन के नियम मानने को तैयार ही नहीं है। विकासखंड के मयारी, सवायन, रुधौली, डीहअसरफाबाद, लालापुर, सरपतहा के पूर्व व प्राथमिक विद्यालय में बने क्वारंटीन सेंटर पर बृहस्पतिवार को ताला लटका मिला। कागजों में यह सभी केंद्र चालू हैं। जूनियर हाईस्कूल सुकरनाकला में लोग एक-दूसरे से दूरी बनाकर दोपहर का भोजन करते मिले। यहां दिल्ली से लौटे कुल 11 लोग रखे गए हैं, जिनके रहने, खाने-पीने, सोने की व्यवस्था की गई है। हालांकि यहां भी चार दिन से डॉक्टर के न आने की लोग शिकायत करते रहे। रुधौली के प्रधान प्रतिनिधि गोपेश तिवारी, मयारी के प्रधान संतोष सिंह, डीहअसरफाबाद के प्रधान प्रतिनिधि रमेश चंद्र शुक्ल ने बताया कि गांव के विद्यालयों में उन्होंने सारी व्यवस्थाएं की हैं। बेड, गद्दा, तकिया, साबुन सब रखवाया है, लेकिन बाहर से आने वाले लोग एक-दो दिन रहकर अपने घर चले गए और फिर वापस नहीं लौट रहे। हम किसी को जबरदस्ती नहीं ला सके। वहीं सवायन के प्रधान ललित दीक्षित ने बताया कि गांव में विभिन्न राज्यों से करीब 80 लोग आए हुए हैं, जिसकी सूची ब्लाक मुख्यालय व सीएचसी सुईथा को सौंप दी गई है। अभी तक कोई भी चिकित्सक उनकी जांच को नहीं पहुंचा है।
जांच में नार्मल आया तो घर चले गए
गौराबादशाहपुर। क्षेत्र के भदेवरा गांव में पांच दिन पूर्व 22 लोग दिल्ली से पहुंचे थे। सभी को गांव के प्राथमिक विद्यालय में क्वारंटीन कर दिया गया। प्रधान के माध्यम से उनके लिए जरूरी इंतजाम भी किए गए। दो दिन तक सभी क्वारंटीन सेंटर में ही रहे। मुफ्तीगंज सीएचसी से आई टीम ने सभी का स्वास्थ्य परीक्षण किया। प्राथमिक परीक्षण में सभी की स्थिति सामान्य पाई गई। नतीजा दो दिन रहने के बाद सभी अपने-अपने घर चले गए। घर पर वह आम लोगों की तरह ही एक-दूसरे से मिलजुल रहे हैं। क्वारंटीन नियमों का पालन नहीं हो रहा। प्रधान मालती चौबे के प्रतिनिधि सत्यानंद चौबे ने बताया कि सभी के लिए विद्यालय में व्यवस्था की गई थी, मगर दो दिन बाद कोई भी यहां रुकने को तैयार नहीं हुआ।
पुलिस के पहरे में रोके गए लोग
बदलापुर। सल्तनत बहादुर इंटर और पीजी कॉलेज में बने आश्रय स्थल में 284 लोगों को रखा गया है। प्रशासन इनके रहने, खाने से लेकर हर छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा कर रहा है। चाय, नाश्ता, भोजन मिल रहा है, बावजूद वह आश्रय स्थल में रहने की बजाए घर जाने के लिए परेशान हैं। इसे लेकर वह हंगामा भी कर चुके हैं। आश्रय स्थल से कोई भाग न पाए इसके लिए गेट पर ही असलहे के साथ पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो हर वक्त कड़ी निगरानी रख रहे हैं। बार-बार उन्हें हिदायत दी जा रही है कि 14 दिन से पहले घर जाने की कोशिश न करें, वरना उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। गुरुवार को प्रभारी निरीक्षक राजेश यादव ध्वनि विस्तारक यंत्र से यह घोषणा करते रहे। जयगुरुदेव आश्रम के अलावा समाज सेवी उन्नत सिंह, श्याम सिंह, मुंबई के एके सिंह, रूपचंदपुर के पूर्व प्रधान शिवनारायण सिंह, भइयालाल निगम आदि लोग आश्रय स्थल में रहने वालों को भोजन सामग्री दे रहे हैं।
नौ आश्रय स्थलों में रखे गए हैं 825 लोग
जौनपुर। गांवों में बने क्वारंटीन सेंटर के अलावा जिले में नौ बड़े आश्रय स्थल बनाए गए हैं। इनमें कुल 825 लोगों को रखा गया है। डीएम दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि सदर तहसील अंतर्गत मोहम्मद हसन कॉलेज में 231, शिया कॉलेज में 142, शाहगंज तहसील में सर सैयद इंटर कॉलेज में 59, बदलापुर तहसील में सल्तनत बहादुर इंटर कॉलेज में 174, सल्तनत बहादुर डिग्री कॉलेज में 110 लोग, मड़ियाहूं में 25 लोग, मछलीशहर के बिहारी महिला महाविद्यालय में 53, मुंगरा के सर्वजन इंटर कॉलेज में 31, केराकत के शिवमूर्ति बालिका इंटर कॉलेज में 01 व्यक्ति को रखकर निगरानी की जा रही है। बता दें कि कोरोना का संक्रमण फैलने के बाद पिछले एक माह में साढ़े 12 हजार लोग जिले में हैं। पिछले पांच दिनों में ही इनकी संख्या ढाई हजार के आसपास है। इन सभी को 14 दिन तक क्वारंटीन में रखने की हिदायत है।
कोरोना से बचाव के लिए बाहर से आने वाले हर व्यक्ति को 14 दिन क्वारंटीन नियम के पालन का निर्देश दिया गया है। सभी थानाध्यक्ष, स्वास्थ्य टीम, राजस्वकर्मी व प्रधान के माध्यम से इसकी निगरानी कराई जा रही है। अगर कोई भी क्वारंटीन के नियमों कर उल्लंघन करते पाया गया तो उसके विरुद्ध केस दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर इसमें भी कोई लापरवाही बरत रहा तो उस पर कार्रवाई होगी। - दिनेश कुमार सिंह, जिलाधिकारी।