पुरानी पेंशन योजना को बहाल किए जाने, वेतन विसंगतियों को दूर करने और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित करने समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलित राज्य कर्मचारी बुधवार से तीन दिन की हड़ताल पर चले गए। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले आंदोलित कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और वादा खिलाफी का आरोप लगाया। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सभी कार्यालयों में कामकाज ठप रहा।
कलेक्ट्रेट में धरना सभा को संबोधित करते हुए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना को बंद कर सरकार ने कर्मचारियों के साथ अन्याय किया है। अवकाश प्राप्त के बाद किसी भी कर्मचारी को आजीविका के लिए पेंशन ही सहारा होती थी लेकिन सरकार ने उसे भी बंद कर दिया। कहा कि राज्य कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी जानी चाहिए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा बहू व संविदा कर्मचारियों को नियमित करने तक 20 हजार रूपये मासिक मानदेय दिया जाना चाहिए। लिपिक संवर्ग का ढांचा पुनर्गठित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व में हुई वार्ता के दौरान सरकार ने सभी मांगों को मान लिया था। लेकिन समझौते के अनुरूप शासनादेश जारी नहीं किया गया। जिसके चलते तीन दिवसीय हड़ताल का निर्णय लिया गया है।
आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष सरिता सिंह और मंत्री सुनीता यादव ने कहा कि पदोन्नति के नाम पर वे किसी को कोई चंदा नहीं देंगी। अगर कोई उनसे चंदा मांगता भी है तो उसकी शिकायत अध्यक्ष से करेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रान्तीय अध्यक्ष इंजीनियर हरि किशोर तिवारी की पहल पर सरकार ने प्रमुख सचिव बाल विकास पुष्टाहार को दो माह में कार्यवाही पूर्ण करने का निर्देश दिया है। जिस पर अध्यक्ष राकेश श्रीवास्तव व जिला मंत्री सीबी सिंह ने आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं के संघर्ष में साथ देने का वादा किया।
धरना सभा को इंजीनियर जीएन दूबे, ओपी राय, आरपी पांडेय, हुबलाल शुक्ला, बदरे आलम, इंजीनियर जेडी सिंह, सीबी सिंह, अशोक कुमार, एलएन चौरसिया, माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष नरसिंह बहादुर, डा. प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, सुधाकर सिंह, राणाप्रताप सिंह, अतुल कुमार सोलंकी के साथ्ा ही कई विभागों के कर्मचारी मौजूद थे।