जौनपुर। जिले में फर्जी डिग्री के सहारे बेसिक शिक्षा परिषद में नौकरी करने वाले दो शिक्षकों की बर्खास्तगी कोई नया मामला नहीं हैं। एक वर्ष के भीतर जिले में 28 शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है। जिन शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है उनमें सबसे अधिक उर्दू शिक्षक हैं। किसी ने मेरिट बढ़ाने के लिए अंक पत्र में नंबर बढ़ा लिया तो किसी ने पूरी डिग्री फर्जी लगाकर नौकरी हासिल कर ली। शिकायतों के बाद जांच हुई तो परत दर परत खुलासा होता रहा और विभाग उनकों बर्खास्त करता रहा। जिन शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त किया गया है उनसे वेतन की रिकवरी के भी आदेश दिए गए लेकिन अभी तक किसी से वेतन की रिकवरी विभाग नहीं करा सका।
पिछले दो दिन के भीतर दो फर्जी शिक्षकों की बर्खास्तगी ने बेसिक शिक्षा विभाग में नई हलचल पैदा कर दी है। विभागीय सूत्रों की माने तो अभी कुछ और शिक्षकों पर गाज गिर सकती है। गोपनीय शिकायत पर हुई जांच में उनके डिग्रियां संदिग्ध पाई गई हैं। डिग्री के सत्यापन के लिए संबंधित विश्वविद्यालयों को भेजा गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. राजेंद्र सिंह ने बीते वर्ष 28 फरवरी को 11 शिक्षकों को बर्खास्त किया था। जबकि 27 फरवरी को आठ शिक्षकों की बर्खास्तगी हुई थी। 28 फरवरी को जिन 11 शिक्षकों को बर्खास्त किया गया था उनमें पांच उर्दू अध्यापक थे जिनकी फर्जी डिग्री थी। जबकि बदलापुर विकास खंड के अलग अलग विद्यालयों में तैनात छह अध्यापक बिना किसी सूचना के लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे थे।
बाद में चार अप्रैल को एक साथ सात उर्दू अध्यापकों को बर्खास्त किया गया था। वे मोअल्लिम और टीईटी के फर्जी अंक पत्र के सहारे वर्ष 2016 में शिक्षक बन गए थे। नौकरी ज्वाइन करने के बाद शासन का निर्देश था कि किन्हीं दो प्रमाण पत्रों का सत्यापन रिपोर्ट आने पर उन्हें वेतन दे दिया जाए। जिसके आधार पर उन्हें वेतन तो दे दिया गया लेकिन बाद में मोअल्लिम और टीईटी के अंक पत्र की सत्यापन रिपोर्ट आई तो पता चला कि उनकी डिग्री फर्जी मिली।