बदलापुर निवासी प्रतीक यादव, जो विपिन के साले हैं, उन्होंने बताया कि घटना से एक दिन पहले उनकी बहन सोनाली ने विपिन से फोन पर बात की थी। बातचीत के दौरान विपिन ने बताया था कि एसआईआर सूची में नाम जोड़ने और हटाने को लेकर अधिकारियों द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है। कहा गया कि एसडीएम, लेखपाल और खंड विकास अधिकारी 700 लोगों के एसआईआर फार्म भरने का दबाव डाल रहे थे, जबकि विपिन पहले ही 350 लोगों का कार्य पूरा कर चुके थे। दबाव के बावजूद उनसे ओबीसी वर्ग के लोगों के नाम हटाने और अन्य नाम जोड़ने को मजबूर किया जा रहा था। इसी मानसिक दबाव के चलते उन्होंने यह कदम उठाया। कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
आठ माह से रुका था वेतन
विपिन के पिता सुरेश कुमार यादव ने बताया कि पिछले आठ महीनों से उनके बेटे का वेतन रुका हुआ था, जिसके चलते वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। अधिकारियों की ओर से केवल कार्यों का दबाव डाला जा रहा था और वह कई बार रिश्तेदारों से मदद लेकर खर्च चलाते रहे। पिता का कहना है कि इसी तनाव विपिन ने जान दे दी।
मासूम अभि को पिता के निधन की खबर नहीं
विपिन का चार वर्षीय पुत्र अभि अपने पिता की मौत से बेखबर है। ग्रामीणों के अनुसार, वह लगातार इस उम्मीद में बैठा है कि उसके पिता बाहर काम पर गए हैं और जल्द ही घर लौट आएंगे। बुधवार सुबह से बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार को सांत्वना देने पहुंचे हुए हैं।
विपिन की मौत से पूरा परिवार शोक में डूब गया है। उनकी मां आशा और बहन सोनालिका का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के कई सदस्य घटना के लिए विभागीय अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए मानसिक प्रताड़ना को कारण बता रहे हैं।
घर के बाहर पुलिस बल तैनात
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के दौरे के बाद प्रशासन भी सतर्क हो गया है। थाना प्रभारी अमरेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंगलवार रात से ही पुलिस बल तैनात है। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है।