ब्रिटिश काल 1870 में बनी जेल
ब्रिटिश काल 1870 में बनी जौनपुर की इस जेल में वर्तमान में 151 कैदी हैं। इसमें 137 पुरुष और 14 महिला शामिल हैं। इसी तरह विचाराधीन बंदी 602 हैं, इनमें 543 पुरुष और 33 महिला और 26 अल्पवयस्क शामिल हैं। विभिन्न जेलों से गंभीर आरोप में आए 11 बंदी-कैदी भी हैं।
गमछे की जगह तौलिया क्यों
- कम लचीलापन: तौलिया अमूमन गमछे की तुलना में छोटा और कम लचीला होता है, जिससे इसका फंदा बनाना या इसे किसी गलत गतिविधि में इस्तेमाल करना कठिन होता है।
- सामान छिपाना नामुमकिन: तौलिए की मोटाई के कारण इसमें किसी भी प्रतिबंधित वस्तु को छिपाना आसान नहीं होता, जिससे सुरक्षाकर्मियों के लिए निगरानी रखना सुगम हो जाएगा।
- कैंटीन में उपलब्धता: कैदियों की व्यक्तिगत स्वच्छता प्रभावित न हो, इसके लिए जेल की कैंटीन में ही तौलिए उपलब्ध करा दिए गए हैं।
1200 बंदी-कैदी के क्षमता की बन रही नई जेल
नई जेल की क्षमता 1200 कैदियों की होगी। कुद्दूपुर, इंदरिया, रंजीतपुर में बन रही है। भवन निर्माण का जिम्मा लोक निर्माण विभाग वाराणसी के भवन खंड को सौंपा गया है। नई जेल में वीडियों कांफ्रेंसिंग की भी व्यवस्था की जाएगी। यह जेल पूरी तरह से हाईटेक होगी, इसमें उच्च सुरक्षा बैरक, अस्पताल, सीसीटीवी, अधिकारियों के आवासीय परिसर होंगे। फरवरी 2026 तक निर्माण पूरा करना था। जेल अधीक्षक के मुताबिक अभी तक 75 फीसदी ही काम हो पाया है। जबकि इसी जुलाई में काम पूर्ण करने देने का समय सीमा तय है।
अधिकारी बोले
जेल की सुरक्षा और बंदियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जेल में गमछा ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके स्थान पर अब केवल तौलिए के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। यह निर्णय जेल की आंतरिक व्यवस्था और सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए लिया गया है। -पीके त्रिवेदी, जेल अधीक्षक, जौनपुर