उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि पिता जी इनसे (ओम प्रकाश श्रीवास्तव) से ज्यादा किसी के साथ रहे हो, क्योंकि दोनों लोगों की विचारधारा एक जैसी थी। मैं स्वर्गीय ओम प्रकाश श्रीवास्तव से आखिरी समय तक मार्गदर्शन लेता रहा हूं। मेरे समझ से पिता जी के करीबी नेताओं में वह आखिरी व्यक्ति रह गए थे।
दोनों लोगों ने राजनीति में आने के बाद हमेशा देश के विकास के लिए काम किया और व्यक्तिगत मार्ग नहीं देखा। वे हमेशा सोचते थे कि देश अंखड रहे। विकास करें इस तरह सबको आगे बढ़ाए।