केराकत कोतवाल ने कहा कि प्रथम दृष्टया लग रहा है कि हमलावर पहले से ही घर मे मौजूद था, क्योंकि जिस कमरे में घटना हुई है वहां और पूरे मकान मे जाने का सिर्फ एक ही रास्ता है। जो घटना के बाद भी अंदर से बंद था।
ऐसे मे सवाल उठता है कि आरोपी वारदात अंजाम देने के बाद कैसे फरार हुआ। मामले में पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है। इधर, घटना के संदर्भ में स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने गोली चलने की आवाज नहीं सुनी। कई लोगों ने कहा कि महिला महंत का व्यवहार अच्छा नहीं था।
रामजानकी मठ थानागद्दी पर अधिकार के लिए बम्मावन गांव निवासी रविंद्र नाथ सिंह और रामकिशोर दास में विवाद था। जिसका मुकदमा हाईकोर्ट में चल रहा है। महंत रामकिशोर दास ने अपनी मृत्यु से पहले इंद्रावती दास को मठ का महंत बना दिया था। जिसे लेकर रविंद्र नाथ सिंह से विवाद अभी भी चल रहा है। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है।
साध्वी इंद्रवती दास महराज और उसका भाई ऋषि गुप्ता दोनों ही बचपन से महंत रामकिशोर दास के साथ रहते थे। 2017 मे रामकिशोर दास ने अपनी मृत्यु से पहले मठ का उत्तराधिकारी इंद्रवती दास को बना दिया। जिससे भाई-बहन में विवाद हो गया। जो क्षेत्र में चर्चा का विषय भी रहा था।
महंत की मृत्यु के बाद इंद्रवती ने अपने भाई को मठ से निकाल दिया था। जिसके बाद वह थानागद्दी बाजार में किराए के मकान में रहता है। दोनों का आपसी विवाद भी घटना का कारण माना जा रहा है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।