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Jaunpur News: ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों की सूख रही आंखें, सिकुड़ रहा रेटिना

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ओपीडी में लगी भीड़। संवाद
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14 से 15 साल तक के बच्चों में मायोपिया की शिकायत बढ़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
जौनपुर। बच्चों को अधिक समय तक मोबाइल देखना बच्चों के लिए घातक साबित हो रहा है। 14 से 15 साल के बच्चों में मायोपिया की शिकायत मिल रही है। बच्चों की आंखें सूख रही हैं और रेटिना सिकुड़ रही है। इसके चलते बच्चों को धुंधला दिखाई दे रहा है। चिकित्सकों की माने तो हर 50 बच्चों में औसतन दो से तीन बच्चों में यह शिकायत मिल रही है। ऐसे बच्चे जो ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं उनमें भी ऐसी समस्या आ सकती है।
बच्चों को व्यस्त रखने के चक्कर में मोबाइल पकड़ाकर अभिभावक काम में व्यस्त हो जाते हैं। छोटे बच्चे कई-कई घंटे मोबाइल देखने में व्यस्त रहते हैं। लगातार एकटक मोबाइल ताकने से आंख का पानी सूख रहा है, इसके चलते रेटिना सिकुड़ रहा है। ऐसे हालत में बच्चों को नजदीक का वस्तुएं साफ नहीं दिखाई दे रही है। उन्हें चश्मा लगवाना पड़ रहा है।
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बच्चों को आउट डोर गेम के लिए प्रेरित करें बच्चे
चिकित्सकों की मानें तो दो से पांच साल के बच्चों को घर के बड़े भाई बहन के साथ आउट डोर गेम के लिए प्रेरित करना चाहिए। ऐसा करने से उनका खेलने का समय बाहर बीतेगा और वह मोबाइल से दूर रहेंगे। धीरे-धीरे उनमें बाहर खेलने की आदत पड़ जाएगी। उनमें मोबाइल देखने से दूरी बन जाएगी। इससे आंखें सुरक्षित रहेंगी। स्क्रीन पर अधिक समय तक ध्यान केंद्रित करने से मोबाइल से निकलने वाली रेडिएशन से बच्चों के आंखों की रोशनी जाने का खतरा बना रहता है।


पुतली सफेद दिखे, बच्चा सीधे न देखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
बच्चे के आंख की पुतली सफेद दिखने लगे और बच्चा सीधे देखने के बजाय तिरछा देखने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर उसका इलाज शुरू कराएं। इलाज में देरी पर बच्चों की आंख पर मोटे शीशे वाले चश्मे चढ़ जाते हैं।
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वर्जन-
दो से पांच साल के बच्चों में रेटिना के खराब होने की शिकायत अधिक मिल रही है। जांच पर पता चलता है कि बच्चों में काफी समय से मोबाइल देखने की लत है। पिछले माह दो बच्चे मिले थे। जिन्हें धुंधला दिखता था। क्लास में सामने बैठने पर भी उन्हें साफ नहीं दिखता था।
डॉ. वीरेंद्र कुमार यादव,नेत्र रोग विशेषज्ञ
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