जौनपुर। पेंशनरों को सालभर में एक बार कोषागार कार्यालय में जीवित होने का प्रमाणपत्र देना पड़ता है। ऐसे में सीनियर पेंशनरों की समस्या को देखते हुए कोषागार की तरफ से नई पहल की गई है। आवेदन करने पर कर्मचारी उनके घर जाकर जीवित होने की पुष्टि कर रहे हैं।
जिलेभर में कोषागार कार्यालय से पेंशन प्राप्त करने वाले कुल 24 हजार 706 पेंशनर है। इनको प्रतिवर्ष जीवित होने का प्रमाणपत्र देना पड़ता है। इसके लिए पेंशनर चाहे मार्च या साल के किसी माह में उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं। साथ ही ट्रेजरी में पेंशनरों के अंगूठे का निशान ऑनलाइन किया जाता है, जिससे उनको आना भी न पड़े। वह पास के सहज जनसेवा केंद्र से अपने अंगूठा के निशान को लगाकर जीवित होने की पुष्टि का फार्म जमा कर दें। अभी भी 50 फीसदी से अधिक पेंशनर जीवित होने का प्रमाण मैनुअल दे रहे हैं। ऐसे में वर्ष में एक बार उनकी उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
इस उम्र के हैं इतने पेंशनर :-
जिले में कुल पेंशनर 24 हजार 706 हैं। 80 वर्ष से कम के 22 हजार 195, 80 से 85 वर्ष के 717 पेंशनर, 85 से 90 वर्ष के 589 पेंशनर, 90 से 95 वर्ष के 167 पेंशनर, 95 से 100 वर्ष के पेंशनर 32 पेंशनर, 100 वर्ष से अधिक के छह पेंशनर हैं।
ऐसे पेंशनर जो आने में अक्षम हैं, उनके परिजनों के आवेदन पर कोषागार के कर्मचारियों को उनके घर भी जीवित होने की जांच के लिए भेजा जा रहा है। ताकि पेंशनर को परेशान न होना पड़ा। -उमाशंकर, वरिष्ठ कोषाधिकारी।