दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपी दंपती भागना चाहते थे। लेकिन, ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने उन्हें घर के बगल से गिरफ्तार कर लिया, साथ ही उनकी निशानदेही पर बांका भी बरामद कर लिया। थानाध्यक्ष सिकरारा सैयद हुसेन मुंतजर, सीओ सदर रणविजय सिंह ने घायल जतिन को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। वहीं, दोपहर ढाई बजे पहुंचे एएसपी सिटी डॉ. संजय कुमार, एडीएम राम प्रकाश ने घटना के बारे में जानकारी हासिल की।
चचेरे भाई-भाभी द्वारा दिनदहाड़े सगी बहनों की हत्या की वारदात के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है। बहनों की हत्या की सूचना पर अपनी ससुराल अलईया(सुजानगंज) से पति प्रतीक उपाध्याय के साथ रोते बिलखते मायके पहुंची पुष्पा को अब भी विश्वास नहीं हो रहा है कि उनकी प्यारी बहनें इस दुनिया में नहीं हैं। उसने कहा कि जिसकी कलाई में राखी बांधकर कर दोनों बहनों ने अपनी सुरक्षा का वचन लिया था उसी ने खून कर दिया।
कहा कि ताऊ और पिता जी में भले ही जमीन के विवाद को लेकर मनमुटाव था लेकिन हम बहनों में ऐसी कोई भावना नहीं थी। आशीष को भी हम भाई ही जानते थे। लेकिन वह तो बहनों का हत्यारा निकला। ताऊ के बेटे पर इस तरह का खून सवार हुआ कि दोनों बहनों की जिंदगी ही छीन ली। भगवान ने ही बचा लिया वर्ना शायद इकलौते भाई की भी जान नहीं बचती। उसने आशंका जताई कि आशीष के जेल से बाहर आने पर उसके भाई को जान का खतरा है।
जमीन के विवाद को लेकर दो बहनों की हत्या से हर कोई सकते में है। उस खूनी मंजर को जिसने भी देखा रूह कांप जा रही है। रमाशंकर पांडेय, शिव शंकर, विजय शंकर, संतोष व दिव्यांग पवन पांच सगे भाई हैं। सभी पुराने पुश्तैनी मकान के अलग सुविधानुसार घर बनवाकर रहते हैं। पवन अपनी माता सुभद्रा के साथ पुराने घर पर ही रहता है।
जमीन का बंटवारा आपसी सहमति से करके सभी खेती करते है। घर के पास स्थित एक बीघे जमीन को चार बराबर हिस्से में बाटा गया था। रमाशंकर के हिस्से की जमीन में उसके बेटे आशीष ने बृहस्पतिवार की सुबह शौचालय बनवाना शुरू किया तो पक्की नाप के बाद ही नया निर्माण करवाने की बात कहते हुए पूर्णिमा, अंतिमा व जतिन विरोध करने लगे। इसी बात को लेकर आशीष व उसकी पत्नी ने दोनों बहनों की हत्या कर दी।
अभियुक्त आशीष व जतिन के माता-पिता घटना के समय मुंबई में थे। आशीष और जतिन दोनों अपने मां-बाप के इकलौते बेटे हैं। शिव शंकर मुंबई टूर एंड ट्रेवेल कंपनी में कार चला कर परिवार चलाते हैं । बेटियों की हत्या की खबर पाकर वे घर रवाना हो गए हैं। आसपास के लोगों का कहना है कि यदि परिवार के मुखिया घर पर होते तो शायद घटना टल सकती थी।
जिन बेटियों के हाथ पीले करने की ख्वाहिश में शिवशंकर दिन-रात एक कर मुंबई की सड़कों पर कार दौड़ाते थे उसे अपने ही भतीजे ने एक पल में चूर कर दिया। शिवशंकर पांडेय की पांच बेटियां पूनम, पूजा, पुष्पा, पूर्णिमा, अंतिमा थी। इनमें सबसे बड़ी पूनम का शादी के बाद निधन हो गया था। पूजा व पुष्पा की शादी हो चुकी है।
जबकि बाद की दोनों बेटियों की शादी करनी थी। उनकी मंझली बेटी पुष्पा ने बताया कि पापा हमेशा दोनों छोटी बेटियों की शादी की चर्चा किया करते थे। वे इसी उद्देश्य से कभी लंबी छुट्टी नहीं लेते थे। अंतिमा से उसका भाई जतिन बड़ा है। उनका कहना था कि पहले बेटियों के हाथ पीले करके फिर बेटे के लिए बहू घर लाएंगे। लेकिन सारे सपने बिखर गए।