पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में बृहस्पतिवार को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर नमन राष्ट्रकवि विषयक संगोष्ठी क ा आयोजन किया गया। यह आयोजन अनुवाद और उत्कृष्टता केंद्र जनसंचार विभाग, भारतीय भाषा संस्कृति, कला प्रकोष्ठ एवं सांस्कृतिक परिषद की ओर से किया गया।
कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्वतंत्रता के पूर्व क्रांतिकारी कवि थे और स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रकवि बने। अपनी प्रतिष्ठित रचना रश्मिरथी में दिनकर ने महाभारत की पूरी घटना को युगबोध के साथ जोड़ा और एक नए दृष्टिकोण से चित्रित किया। उन्होंने कहा कि कविता कवि की मानस पुत्री होती है। दिनकर ने अपनी कविता के माध्यम से बड़े सरल शब्दों में विविध संदेश दिए हैं जो कि आज भी प्रासंगिक हैं।
कुलसचिव महेंद्र कुमार ने कहा कि जन-जन में राष्ट्र भावना को जागृत करने में दिनकर के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। कार्यक्रम का संचालन संयोजक एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ. मनोज मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ. रसिकेश ने किया। इस अवसर पर प्रो. मानस पांडेय, प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. राजेश शर्मा, प्रो. वंदना राय, प्रो. देवराज, प्रो. राम नारायण, डॉ. राजकुमार, डॉ. प्रमोद यादव, सहायक कुलसचिव बबीता, डॉ. गिरधर मिश्र, डॉ. एसपी तिवारी, डॉ. श्याम कन्हैया सिंह, डॉ. केएस तोमर, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. अवध बिहारी सिंह, डॉ. चंदन सिंह, डॉ. पुनीत धवन, लक्ष्मी प्रसाद मौर्य, डॉ. पीके कौशिक,रजनीश सिंह, अशोक सिंह, धीरज श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।