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79 जर्जर विद्यालय भवनों का हुआ ध्वस्तीकरण

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गंभीर खतरे का कारण बने परिषदीय विद्यालय के 482 जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया डेढ़ साल में भी पूरी नहीं हो सकी। गनीमत है कि कोरोना संक्रमण के चलते अभी तक बच्चों को विद्यालय नहीं बुलाया जा रहा है वरना बच्चों की जान भी सांसत में पड़ सकती है।
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1951 से लेकर वर्ष 2000 के बीच बने परिषदीय विद्यालयों के 482 भवनों के जर्जर होने की रिपोर्ट फरवरी 2020 में ही तैयार हो चुकी थी। जर्जर विद्यालय भवनों के भौतिक सत्यापन के लिए ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, लोक निर्माण और लघु सिंचाई विभाग के इंजीनियरों की संयुक्त कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी को सत्यापन के लिए फुर्सत ही नहीं मिल रही है। डेढ़ साल में सिर्फ 286 विद्यालय भवनों का भौतिक मूल्यांकन का कार्य पूरा हुआ है। इनमें से 79 विद्यालय भवनों को इसी साल ध्वस्त किया गया है। अभी 186 विद्यालय के ऐसे जर्जर भवन हैं जिन्हें भौतिक मूल्यांकन का इंतजार है। बीएसए डॉ गोरखनाथ पटेल का कहना है कि 286 विद्यालयों के जर्जर भवनों की भौतिक मूल्यांकन की रिपोर्ट आ चुकी है। जिन विद्यालय भवनों की सत्यापन रिपोर्ट आ चुकी है उसके ध्वस्तीकरण के लिए संबंधित विद्यालय प्रबंध समिति को निर्देश दे दिए गए हैं। बाकी विद्यालयों की सत्यापन रिपोर्ट आने पर ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जाएगी।
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