करंजाकला। मेरा गांव मेरी धरोहर एप के जरिए अब कामन सर्विस सेंटर गांव के बिखरे धरोहरों को सहेजेगा। हर गांव का सर्वे कर धरोहर को केंद्र सरकार तक पहुंचाएगा। फिर हर गांव की धरोहरों को कोई भी कहीं से देख और जान सकेगा। इससे आने वाले समय में गांव की संस्कृति को नई पहचान मिलेगी।
भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय और सीएससी के मध्य पिछले दिनों अनुबंध किया जा चुका है। जौनपुर में इस योजना का ट्रायल भी किया जा चुका है। करंजाकला ब्लाक के सीएससी के 40 संचालकों को ट्रेनिंग करा दी गई है। सर्वे के दौरान गांव के अपनी धरोहर, सांस्कृतिक विशेषता, रहन-सहन की भी जानकारी देगी। उनका नाम और फोटो के साथ वीडियो को एप पर अपलोड किया जाएगा। धरोहर के साथ एप सामाजिक कार्य और सुविधाओं की भी जानकारी देगा। कॉमन सर्विस सेंटर और केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार के साझा सहयोग से पहली बार यह कार्य किया जा रहा है। इसे मेरा गांव मेरी धरोहर नाम दिया गया है। गांव के नागरिकों के सहयोग से गांव, ब्लॉक, जिले विशेष बनाएगी और उसकी खासियत को दर्ज किया जाएगा।
एप पर दर्ज होगी यह जानकारी
करंजाकला। इस सर्वे के दौरान यह दर्ज करना है गांव की खास पहचान क्या है। खास सांस्कृतिक, गांव के प्रसिद्ध स्थान, प्रसिद्ध किवदंती, प्रसिद्ध व्यक्ति, विशेष पकवान, विशेष आभूषण, विशेष कपड़े आदि के बारे में जानकारी दर्ज कि जानी है। संबंधित जानकारी, फोटो, वीडियो आदि एप पर दर्ज होंगी। सीएससी जिला प्रबंधक विजय गुलशन पांडेय ने बताया कि मेरा गांव मेरी धरोहर से लोग जानकारी पा सकेंगे।