आतंकी आरोपी ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू भाई को बुधवार को कड़ी सुरक्षा में पेशी पर अदालत ले जाती पुलिस।
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श्रमजीवी एक्सप्रेस बम विस्फोट कांड के आरोपी हूजी के आतंकी ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू भाई को अदालत ने बुधवार को फांसी की सजा सुनाई। इस मामले में कोर्ट ने उसे मंगलवार को ही दोषी करार दिया था। इससे पहले कोर्ट इसी मामले में मो. आलमगीर उर्फ रोनी को 30 जुलाई को फांसी की सजा सुना चुकी है।
बुधवार को दिन में1.55 बजे हूजी के आतंकी ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू भाई को पुलिस ने अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम बुधिराम यादव की अदालत में पेश किया। दंड के प्रश्न पर सुनवाई शुरू हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता राकेश कुमार यादव ने इसे विरलतम मामला बताया। कहा कि अभियुक्त को मृत्युदंड से कम की सजा न दी जाए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रदीप कुमार श्रीवास्तव कि दलील थी कि यह केस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और ओबैदुर्रहमान मुख्य अभियुक्त नहीं है। अत: इसे कम से कम सजा दी जाए। न्यायाधीश ने बहस एवं तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 2.30 बजे आतंकी आरोपी ओबैदुर्रहमान बाबू उर्फ बाबू भाई निवासी चलपरा, थाना धनउल, जिला बगुरा बंगलादेश को आईपीसी की धारा 302/120बी में मृत्युदंड, धारा 307/120बी में 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं पांच लाख रुपये अर्थ दंड, धारा 4 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम में आजीवन कारावास एवं पांच लाख रुपये अर्थ दंड तथा 14 फारनर्स एक्ट में पांच वर्ष का सश्रम कारावास एवं 25 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई।
बता दें कि 28 जुलाई 2005 को पटना से नई दिल्ली जा रही श्रमजीवी एक्सप्रेस की सामान्य बोगी में हरपाल गंज रेलवे स्टेशन के आगे हरिहरपुर क्रासिंग के पास विस्फोट हुआ था। इसमें आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें 12 यात्रियों की मौत हो गई थी जबकि 18 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ट्रेन के गार्ड जाफर अली ने 28 जुलाई 2005 को जीआरपी थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वर्ष 2005 से यह मामला अदालत में चल रहा था। ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू भाई आदि के मामले में कुल 42 गवाह पेश किए गए। श्रमजीवी बम विस्फोट मामले में कुल सात आरोपी हैं। जिसमें दो फरार चल रहे हैं। एक की मौत हो गई है।