जौनपुर। हाईकोर्ट की रोक के बाद भी शहर में खुलेआम चाइनीज मांझा बिक रहा है। प्रशासन और दुकानदारों की मिलीभगत मौत का मांझा लोगों पर भारी पड़ रहा है। एक सप्ताह में चार लोग मांझे की चपेट में आने से घायल हो चुके हैं। एक बार फिर लोगों को मांझे का भय सताने लगा है। पिछले वर्ष एक किशोर की मौत हो गई थी और 20 से अधिक लोग घायल हो गए थे। मकरसंक्रांति त्यौहार नजदीक आते ही मांझे की बिक्री बढ़ने लगी है। अभी तक प्रशासन ने किसी भी दुकानदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
नगर कोतवाली क्षेत्र के शास्त्री पुल पर बुधवार को जाते समय अधिवक्ता रवि सिन्हा एवं भुवन चाइनीज मांझा की चपेट में आ गए। उनके हाथ की अंगुलियां कट गई। लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। इसके अलावा दो अन्य लोग भी रासमंडल और मियांपुर में घायल हो चुके हैं। मकर संक्रांति का पर्व आते ही पतंगबाजी शुरू हो जाती है। पिछले वर्ष कोतवाली क्षेत्र के कालीकुत्ती 15 सितंबर की शाम उमरपुर निवासी उत्तम दूबे की चाइनीज मांझे की चपेट में आने से मौत हो गई थी। उत्तम की मौत के बाद पूरा परिवार सदमे से अभी भी उबर नहीं पाया है। वहीं, 20 से अधिक लोग घायल भी हुए। शहर के ताड़तला, नवाब युसुफ रोड, सिपाह, शाही किला, लाइन बाजार, पुरानी बाजार, रूहट्टा, ओलंदगंज, चहारसू, नखास आदि इलाकों में चाइनीज मांझे की दुकानें सज गई हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को भी यह दुकानें दिख रही हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। 2009 में पूरे देश में उस समय इस रोक लगा जब पेड़ों और खंभों में फंसे कई चिड़ियों की मौत हो गई और कई घायल हो गए थे। बावजूद इसके कोई ठोस कदम प्रशासन नहीं उठा रहा है।
जौनपुर। चाइनीज मांझा शीशे के चूरे और गोंद से बनाया जाता है। लोगों का कहना है कि यह पूरी तरह से रेजर जैसा काम करता है। यह कभी नष्ट नहीं होता और कपड़े के ऊपर से भी गर्दन और शरीर के अंग कट जाते हैं। मांझा अगर शरीर को छू जाए तो कटना तय है। यही नहीं, खून की सप्लाई वाली नस और श्वास नली भी कट सकती है। इससे लोगों की मौत भी हो सकती है। इससे चोट लगने पर घाव पक जाता है।
जिले के सभी एसओ को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन के साथ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
दिनेश पाल सिंह, एसपी