बारादरी
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बारादरी की ताजमहल से भी होती थी तुलना, आज खंडहर
कलीचाबाद के पास गोमती तट पर स्थित ऐतिहासिक कालिच खान का मकबरा संरक्षण के अभाव में जर्जर हो रहा है। बारादरी के नाम से प्रसिद्ध इस इमारत के गुंबदों में मोटी दरारें पड़ गई हैं। बारिश का पानी अंदर पहुंचने से छत और दीवारों को भी नुकसान हो रहा है। गुंबद पर घास उग आई है, जबकि लखौरिया ईंटों से बनी दीवारें भी कमजोर हो रही हैं। मुगलकालीन वास्तुशैली में बनी यह इमारत अपनी नक्काशी और बनावट के लिए जानी जाती है। इसकी वास्तु विशेषताओं की तुलना ताजमहल से भी की जाती है। इतिहासकारों के अनुसार, 1628 से 1635 के बीच बनी इस इमारत में 12 दरवाजे और पांच कब्रें हैं, जिनमें कालिच खान, उनके दो पुत्रों और दो रिश्तेदारों की कब्रें शामिल हैं। बताया जाता है कि कालिच खान अकबर के समय सूरत के किले के किलेदार थे और शाहजहां के काल में उन्हें जनपद में भेजा गया था।
एक दिन पहले भी कुछ लोग आए थे वे भी समस्याएं बता रहे थे। फिलहाल, इस संबंध में पुरातत्व और पर्यटन विभाग से वार्ता की जाएगी, जो भी हो सकेगा उसे कराया जाएगा।
- सैमुअल पॉल एन, डीएम