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कोख में सुरक्षित हुई बेटियां जन्मदर में हुई वृद्धि

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जौनपुर। जिले में पैदा होने वाली बेटियां अब सुरक्षित होती जा रही हैं। ‘बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ’ अभियान के साथ ही महिला सशक्तिकरण और मिशन शक्ति का असर भी दिखने लगा है। सरकारी और गैरसरकारी संगठनों की ओर से चलाए गए जागरूकता अभियान का नतीजा है कि जिले में बेटियों के जन्मदर में बढ़ोत्तरी हुई। पीसीपीएनडीटी (लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम-1994) का कड़ाई से पालन कराने की वजह से भी बालिका जन्म दर में वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2021-22 में अब तक जिले में कुल 28,852 लड़के और 28,892 लड़कियों का जन्म हुआ है। हर एक लड़के पर लड़कियों का अनुपात लगभग 1.2 है।
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एसीएमओ डा. राजीव कुमार यादव का कहना है कि गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम 1994 के तहत कन्या भ्रुण हत्या के लिए लिंग परीक्षण करना गैर कानूनी है। इसमें सहयोग करने वालों को भी तीन से पांच साल की जेल व 10 हजार से 1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए जिले में समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए सभी को बताया गया कि लड़कियों का महत्व क्या है। जिसका परिणाम रहा है कि आज जिले में लड़कों से अधिक लड़कियां हैं। कुदरत का यह नियम है कि जितने लड़के पैदा होते हैं उतनी ही लडकियां भी। लेकिन हम अपने लड़कों की चाहत में लड़कियों को भ्रूण में नष्ट कर देते हैं। जिसके चलते दोनों में असमानता आ गई है।
बेटियों की संख्या में कमी के यह है कारण
हर परिवार में लड़के के जन्म को प्रमुखता देना।
बालिका शिशु की भ्रुण अवस्था में ही हत्या।
बाल्यावस्था व किशोरावस्था में बालिकाओं का विवाह।
पोषण और स्वास्थ्य पर उचित ध्यान नहीं दिया जाना।
लड़कियों को शिक्षा के अधिकार से वंचित किया जाना।
लड़कियों की मूलभूत जरूरतों की अनदेखी करना।
लड़के और लड़कियों में जन्म से भेदभाव किया जाना।
इस तरह से हुआ लड़कियों के जन्म सुधार
जौनपुर। लड़के और लड़कियों के अनुुपात में सुधार के लिए सामाजिक जागरूकता के साथ रैली, गोष्ठियों का आयोजन, लड़कियों के महत्व को बताया गया। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शिखा शुक्ला का कहना है कि पीसीपीएनडीटी का कड़ाई से पालन कराने से लड़कियों की संख्या में वृद्धि हुई है। उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य पर अब लोग ध्यान दे रहे हैं। पूविवि महिला अध्ययन केंद्र की समन्वयक डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव का कहना है कि केंद्र की ओर से लोगों को जागरूक करने के लिए मिशन शक्ति, महिला चौपाल, कन्या भ्रूण हत्या रोकने, रंगोली, पोस्टर प्रतियोगिता, वाद विवाद और गायन के जरिए सभी को लड़कियों को महत्व को बताया गया।
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सीएमओ डॉ. लक्ष्मी सिंह ने बताया कि सामाजिक जागरूकता के चलते लोगों की सोच बदल रही है। विभिन्न प्रकार की गोष्ठी, रैली, सेमीनार आदि के साथ लड़कियों के महत्व को बताया जा रहा है। पूरे वर्ष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जिसका परिणाम है कि जिले में लड़कियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।
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