जौनपुर। जिले के दो ब्लाॅक बदलापुर व महराजगंज करीब तीन साल से क्रिटिकल श्रेणी (बेहद कम जलस्तर वाले क्षेत्र) घोषित किए गए हैं। इससे इन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए सरकारी बोरिंग नहीं हो पा रही है। इससे किसानों को सिंचाई में समस्या भी होती है। वे आसपास के लोगों से पानी मांग कर काम चला रहे है। बदलापुर व महराजगंज ब्लाॅक वर्ष 2022 में क्रिटिकल जोन में शामिल किए गए हैं। साथ ही सेमी क्रिटिकल जोन में करंजाकला, मुफ्तीगंज, धर्मापुर, रामनगर, केराकत, सिरकोनी, सिकरारा, बक्शा को शामिल किया गया है। बाकी सभी ब्लाॅक सेफ जोन में हैं तो अतिदोहित एक भी ब्लाॅक नहीं है। इनको सुधारने के लिए विशेष प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत वन विभाग को पौधरोपण करना होता है तो भूमि संरक्षण की तरफ से खेत तालाब बनाया जाता है। साथ ही कृषि विभाग से कच्ची बंधी बनाकर पानी रोपते हैं। इन जगहों पर 27 फीट गहरा पानी होता है।
लघु सिंचाई विभाग ने किए ये काम : इसके तहत लघु सिंचाई विभाग के तहत क्रिटिकल जोन वाले इन ब्लाकों में 2009 से अब तक बदलापुर में 70 चेकडैम, महराजगंज में आठ चेकडैम बने हैं। वहीं तालाब की बात की जाए तो बदलापुर में लघु सिंचाई के तहत दो तालाब बन चुके हैं तो दो निर्माणाधीन हैं। महराजगंज में एक बना रहे हैं। सेमी क्रिटिकल जोन वाले सात ब्लाकों में अब तक करीब 20 चेकडैम व आठ तालाब बनवाए गए हैं।
किसान बोले-महराजगंज ब्लाक के अमारी निवासी किसान बोड़ई सरोज, अमरपाल सिंह, नाहरपुर निवासी बबलू शर्मा, फत्तूपुर निवासी त्रिलोकी सिंह, महेंद्र सिंह, केवटली के बजरंगीलाल गौतम ने बताया कि पिछले तीन साल से किसी प्रकार की बोरिंग किसान नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में सिंचाई के लिए सरकारी इंतजाम होने चाहिए। बदलापुर ब्लाॅक के खम्मपुर निवासी धर्मेंद्र निषाद, जगजीवनपट्टी के रोहित तिवारी, लग्गोपुर के घनश्याम मिश्र, कठार के देवेंद्र दुबे, बेसहूपुर के प्रमोद तिवारी, घनश्यामपुर के सुभाष मिश्र ने बताया कि उनके खेतों की सिंचाई के लिए संकट है। ब्लाॅक को जल्द क्रिटिकल श्रेणी से निकालकर सेफ जोन में किया जाए।
जिले के दो ब्लाक महराजगंज व बदलापुर क्रिटिकल श्रेणी में हैं। इसमें सुधार के लिए तालाब, चेकडैम, पौधरोपण, कच्ची बंधी बनाने का काम होता है। हालांकि इन ब्लाॅकों के सेफ जोन में आने का कोई समय नहीं होता है। सिर्फ क्रिटिकल वाले ब्लाॅकों में मध्यम, गहरी व उथली किसी प्रकार की बोरिंग नहीं होती है। ऐसे में किसान आसपास के क्षेत्रों से पानी लेकर खेतों की सिंचाई करते हैं। - अरविंद राय, सहायक अभियंता, लघु सिंचाई।