उन्होंने कहा कि छात्र इस फार्मूले को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। अटल जी का यह भाषण आज भी नहीं भूलता। उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खासियत यही थी, वह अपनी बातों को इतना प्रभावी ढंग से कहते कि श्रोता उसे असहमत नहीं हो सकते थे।
सरल, सहज और सुलभ थे अटल जी
जौनपुर। पं. दीनदयाल उपाध्याय जब जौनपुर से सांसद का चुनाव लड़ रहे थे, तब अटल बिहारी वाजपेयी ने जौनपुर में लंबा समय बिताया। सड़कों पर पैदल घूमकर चुनाव प्रचार किया। राजा जौनपुर यादवेंद्र दत्त दुबे की हवेली उनका ठिकाना होती थी। कई कार्यक्रमों में अटल जी के साथ प्रचार करने वाले राज कॉलेज में हिंदी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र उपाध्याय बताते हैं कि अटल जी सरल, सहज और सुलभ थे।
उनका कद बड़ा था, लेकिन वह हर किसी से ऐसे मिलते, मानो पुरानी जान-पहचान है। टीडी कॉलेज के प्रबंधक अशोक सिंह ने बताया कि बड़े भाई उमानाथ सिंह के चुनाव में प्रचार के लिए अटल जी का कार्यक्रम था। बाबतपुर हवाई अड्डे पर हम लोग उन्हें लेने पहुंचे थे।
जहाज से उतरते वक्त वह बंद गले की कोट पहने थे, लेकिन तुरंत उन्होंने धोती-कुर्ता पहना और सभा के लिए रवाना हुए। उनका मानना था कि हमारे आचार-विचार में कोई भिन्नता नहीं होनी चाहिए। आसपास के जिलों में भी अटल जी का भाषण होता तो हम लोग उन्हें सुनने जाते थे।